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'हिंदी को यूएन की भाषा बनाने का प्रयास' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि सरकार संयुक्त राष्ट्र की भाषाओं में हिंदी को शामिल करवाने के लिए पूरा प्रयास करेगी. न्यूयॉर्क में आठवें विश्व हिंदी सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के लिए भेजे गए अपने संदेश में मनमोहन सिंह ने कहा कि सम्मेलन के बाद सरकार संयुक्त राष्ट्र तो एक प्रस्ताव बनाकर भेजेगी. तीन दिन का विश्व हिंदी सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून की उपस्थिति में शुक्रवार, 13 जुलाई को हो गया. इस सम्मेलन में तीन दिन में विभिन्न विषयों पर लोग चर्चा करेगें. विश्व-भाषा अपने संदेश में प्रधानमंत्री सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि हिंदी अब विश्व की भाषाओँ में से एक हो गई है और इसके लिए अच्छे सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर तैयार करने की ज़रुरत है. उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य के विद्वानों की किताबें विदेशों में यूनिवर्सिटी और स्कूलों में पढ़ाई जा रही है और इससे हिंदी का अच्छा प्रचार हो रहा है. उन्होंने कहा कि हिंदी के लिए सूचना तकनीक का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए. डॉ सिंह ने कहा कि किसी भी देश का विकास उसे देश में भाषा की प्रगति पर निर्भर करता है. उन्होंने कहा, "हिंदी के बढ़ते प्रभाव का असर हमारे आर्थिक विकास पर पड़ा है." प्रधानमंत्री के संदेश से पहले विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा ने सम्मेलन को संबोधित किया. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों को संबोधित किया. | इससे जुड़ी ख़बरें बीबीसी की हिंदी...13 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'विश्व हिंदी सम्मेलन के उद्देश्य ही संदिग्ध हैं'11 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'आप बुलाएँ हम न आएँ, ऐसे तो हालात नहीं'11 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस अपमान से बचाने के लिए...29 जून, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस विदेशों में पहचान बढ़ रही है हिंदी की09 फ़रवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस लंदन में एक शाम, हिंदी के नाम19 जनवरी, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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