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गुरुवार, 12 जुलाई, 2007 को 09:30 GMT तक के समाचार
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मनमोहन, बुश की फ़ोन पर बात हुई
मनमोहन और जॉर्ज बुश
मनमोहन और बुश के बीच सितंबर में न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान भेंट हो सकती है
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के साथ दोनो देशों के बीच असैन्य परमाणु समझौते के मसले पर टेलीफ़ोन पर बात की है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने कहा, "दोनो नेताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच होने वाली आगामी बैठक के बारे में चर्चा की."

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन 16 जुलाई को वाशिंगटन में अमरीकी सुरक्षा सलाहकार स्टीफ़न हेडली से मुलक़ात करेंगे और समझौते के कुछ बिंदुओं पर बरकरार गतिरोध को दूर करने की कोशिश करेंगे.

अड़चनें

दोनों देशों की इस मसले पर पिछले कुछ महीनों में कई बार उच्च स्तरीय बातचीत हो चुकी है.

पिछले महीने भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और अमरीकी विदेश उप मंत्री निकोलस बर्न्स नई दिल्ली में हुई बातचीत में असहमतियों को दूर करने में विफल रहे थे.

इस समझौते के तहत भारत को अमरीका परमाणु ईंधन की आपूर्ति करेगा लेकिन इसकी शर्तों को लेकर दोनों देशों में कुछ मतभेद हैं.

दरअसल, भारत चाहता है दोनो देशों के बीच 18 जुलाई 2005 को बनी सहमति के तहत परमाणु ईंधन की निर्बाध आपूर्ति की गारंटी को समझौते में शामिल रखा जाए, लेकिन अमरीका इससे पूरी तरह सहमत नहीं है.

 दोनो नेताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच होने वाली आगामी बैठक के बारे में चर्चा की
संजय बारू, मीडिया सलाहकार

अमरीका का कहना है कि कुछ 'विशेष परिस्थितियों' में ईंधन की आपूर्ति रोकी जा सकती है.

इसके अलावा अमरीका भारत से भविष्य में और परमाणु परीक्षण नहीं करने की गारंटी चाहता है.

भारत इसके लिए भी तैयार नहीं है और वह परमाणु परीक्षण का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखना चाहता है.

उम्मीद

समाचार एजेंसियों के अनुसार फ़ोन पर बातचीत के दौरान मनमोहन और बुश ने उम्मीद जताई कि बातचीत का ये सिलसिला उनकी अगली मुलाक़ात में भी जारी रहेगा.

दोनो नेताओं के बीच सितम्बर में मुलाक़ात की संभावना है, जब मनमोहन संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क जाएँगे.

मनमोहन ने हाल ही में कहा था कि समझौते के एक-दो मुद्दों को लेकर मतभेद हैं और इन्हें ज़ल्द ही सुलझा लिया जाएगा.

अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने भी पिछले दिनों कहा था कि इस साल के अंत तक समझौते की सभी अड़चनें दूर हो जाएँगी.

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