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हिमेश बुर्क़ा पहनकर पहुँचे अजमेर शरीफ़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अपनी गायकी से शोहरत हासिल करने वाले हिमेश रेशमिया को अजमेर स्थित ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में ज़ियारत के लिए बुर्क़ा पहनकर जाना पड़ा. मंगलवार की रात रेशमिया जब बुर्क़ा पहनकर ज़ियारत करने पहुँचे तो एकबारगी तो बावेला मच गया, लेकिन बाद में हिमेश के माफ़ी माँगने पर मामला शांत हो गया. ख़ादिमों की संस्था 'अंजुमन' ने भी कहा है कि हिमेश की मंशा गलत नहीं थी और वे महज़ इबादत के लिए आए थे. ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का यह अक़ीदतमंद अपनी फ़िल्म 'आपका सुरूर' की कामयाबी के लिए दुआ करने आया था. बुर्क़े का आइडिया हिमेश ने पहले निज़ाम गेट से दरगाह में दाखिल होना चाहा, लेकिन प्रशंसकों की भीड़ ने उन्हें पस्त कर दिया. बाद में ख़ादिम की सलाह पर हिमेश ने बुर्क़ा पहनकर शर्की गेट से नंगे पैर दरगाह में प्रवेश किया. लेकिन बुर्क़ा के नीचे उनकी पैंट दिखाई दे रही थी और इसी से भेद खुल गया. कुछ ख़ादिमों ने इस पर ऐतराज किया, लेकिन 'अंजुमन' ने पूरे विवाद को यह कहकर शांत कर दिया कि हिमेश बहुत पवित्र भाव से दुआ करने आए थे. अंजुमन के प्रवक्ता सरवर चिश्ती कहते हैं, "हिमेश ने सिर्फ़ भीड़ से बचने के लिए लिबास बदला था. वह खामोशी से दुआ करना चाहते थे. उनकी नीयत में इबादत की पाकीज़गी थी." माफ़ी हिमेश ने भी हाथों-हाथ अंजुमन से कहा, "अगर किसी की भावना को ठेस पहुँची है तो मैं माफ़ी माँगता हूँ." पिछले साल अक्टूबर में फ़िल्म अभिनेत्री कैटरीना कैफ़ के दरगाह में स्कर्ट पहनकर चले जाने से विवाद खड़ा हो गया था. इस दरगाह के प्रति प्रसिद्ध हस्तियों में श्रद्धाभाव रहा है और वे यहाँ मन्नत माँगने आते रहे हैं. |
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