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मंगलवार, 26 जून, 2007 को 13:02 GMT तक के समाचार
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'कमज़ोर राष्ट्रपति देश के लिए ख़तरा'
लालकृष्ण आडवाणी
भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि अगर देश में कमज़ोर राष्ट्रपति बनता है तो एक बार फिर आपातकाल जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं.

पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को संबोधित करते हुए आडवाणी का कहना था कि इमरजेंसी के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले फ़खरूद्दीन अली अहमद भी कमज़ोर राष्ट्रपति थे जिन्होंने हस्ताक्षर करने से पहले यह भी नहीं पूछा कि इस प्रस्ताव पर कैबिनेट बैठक भी हुई है या नहीं.

उनका इशारा यूपीए की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल की तरफ था जिनके बारे में बीजेपी का कहना है कि वो कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की वफ़ादार हैं न कि संविधान के प्रति उनकी वफ़ादारी है.

पार्टी ने मंगलवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए से प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाने के फ़ैसले पर पुनर्विचार करने को कहा.

भाजपा का कहना है कि इस तरह से राष्ट्रपति भवन को ‘दाग़दार व्यक्ति’ से बचाया जा सकता है.

भाजपा ने यूपीए से उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत के पक्ष में सर्वसम्मति बनाने को कहा है.

पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दूसरे दिन वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि पिछले छह दशक में शीर्ष संवैधानिक पद के लिए किसी भी प्रत्याशी पर इस तरह के आरोप नहीं लगे.

सवाल

उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार में ‘दाग़ी मंत्रियों’ के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए भाजपा कई बार राष्ट्रपति भवन गई है, लेकिन अगर राष्ट्रपति भवन में ही दाग़दार व्यक्ति होगा तो क्या होगा?

 इस सवाल पर पूरे देश को गंभीरता से विचार करना चाहिए. मैं यूपीए के सभी घटक दलों से आग्रह करूँगा कि वह प्रतिभा पाटिल की उम्मीदवारी के फ़ैसले पर पुनर्विचार करें
लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा नेता

आडवाणी ने कहा, “इस सवाल पर पूरे देश को गंभीरता से विचार करना चाहिए. मैं यूपीए के सभी घटक दलों से आग्रह करूँगा कि वह प्रतिभा पाटिल की उम्मीदवारी के फ़ैसले पर पुनर्विचार करें.”

कार्यकारिणी की बैठक के दूसरे और अंतिम दिन राजनीतिक, आर्थिक और पहली बार कृषि प्रस्ताव भी पारित किए गए.

प्रस्ताव में कहा गया कि पहले यह कहा जाता था कि प्रधानमंत्री निष्क्रिय हैं पर अब लगने लगा है कि घटक दल चौतरफा दबाव बनाकर अधिक से अधिक लाभ कमा रहे हैं.

बाद में संवाददाताओं से बातचीत में भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि भाजपा को आशँका थी कि शिवसेना शेखावत को समर्थन पर अलग रुख़ अपना सकती है, लेकिन क्षेत्रवाद के आधार पर लिया गया यह निर्णय बेहद निराशाजनक है.

यह पूछे जाने पर कि क्या शिवसेना के साथ संबंधों पर पुनर्विचार किया जाएगा, स्वराज ने कहा, “अभी हमारा पूरा ध्यान शेखावत को राष्ट्रपति चुनाव जिताने पर है. चुनाव के बाद इस बारे में विचार किया जाएगा.”

कृषि प्रस्ताव

भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में पहली बार कृषि प्रस्ताव पारित किए गए, जिसमें एक था कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़) के लिए कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिए.

 अभी हमारा पूरा ध्यान शेखावत को राष्ट्रपति चुनाव जिताने पर है. चुनाव के बाद इस बारे में विचार किया जाएगा
सुषमा स्वराज

इन प्रस्तावों की जानकारी देते हुए वैंकेया नायडू ने कहा कि जिस पेशे से 60 फ़ीसदी लोग जुड़े हुए हों, उसके लिए बजट में दो फ़ीसदी राशि का आवंटन ठीक नहीं है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कृषि आयोग की सिफ़ारिशों को अमलीजामा पहनाया जाना चाहिए.

साथ ही कृषि ऋण पर ब्याज राशि को कम किया जाना चाहिए और धीरे-धीरे घटाकर चार फ़ीसदी तक लाना चाहिए.

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