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शुक्रवार, 22 जून, 2007 को 15:39 GMT तक के समाचार
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'पाकिस्तान परमाणु भट्टी बना रहा है'

ख़ुशहाब
सैटेलाइट से लिया गया चित्रः साभार गूगल
अमरीका के एक थिंक टैंक ने दावा किया है कि उन्हें ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान अपने खुशहाब परमाणु अड्डे पर प्लूटोनियम बनाने वाली एक और परमाणु भट्टी का निर्माण कर रहा है.

थिंक टैंक ने सबूत के तौर पर सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों को पेश किया है जिसमें ये नया रिएक्टर पहले से बन रहे एक और रिएक्टर के बिल्कुल करीब दिखाया गया है.

उनका दावा है कि इस प्लूटोनियम से पाकिस्तान भारत से भी बेहतर किस्म के परमाणु हथियार बना सकेगा और इससे दोनों देशों के बीच एक नए परमाणु दौड़ की शुरूआत हो सकती है.

इंस्टीट्यूट फ़ॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सेक्योरिटी नामक इस थिंक टैंक के लिए ये रिपोर्ट लिखी है डेविड ऑलब्राइट और पॉल ब्रैनन ने और उनका कहना है कि खुशहाब में बन रहे इस रिएक्टर पर पिछले दस महीनों में बहुत तेज़ी से काम हुआ है क्योंकि उसके पहले सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में वहाँ केवल धूल भरा एक ढांचा नज़र आता था.

 हमें इस बात से भी मदद मिली कि ये तीसरा ढांचा बिल्कुल दूसरे की तरह है और इसलिए इसकी क्षमता का अनुमान लगाना आसान था. लेकिन हम कितना सही हैं इसकी पुष्टि तो तभी हो पाएगी जब हमें पाकिस्तान सरकार का जवाब मिले और हमे उस जवाब का इंतज़ार है
डेविड ऑलब्राइट

डेविड ऑलब्राइट ने एक ख़ास बातचीत में बीबीसी को बताया कि पहले उन्हें इस रिएक्टर के बारे में एक ख़ुफ़िया जानकारी मिली.

वो कहते हैं, "इस जानकारी के बाद हमने उपग्रह से ली हुई तस्वीरों से उसकी जांच करने की कोशिश की तो हमें ये सारे सबूत मिले".

डेविड ऑलब्राईट वही हैं जिन्होंने पिछले साल पाकिस्तान के दूसरे परमाणु भट्टी की ख़बर दुनिया के सामने रखी थी और उस समय उसको लेकर ख़ासा विवाद खड़ा हुआ था और उनकी ख़बर को बात में सही पाया गया था. खुशहाब में पाकिस्तान ने अपना पहला रिएक्टर 1998 में बनाया था और ऑलब्राइट का कहना है कि दूसरा रिएक्टर अभी बनकर तैयार नहीं हुआ है लेकिन तीसरे पर काम ज़्यादा तेज़ी से चल रहा है.

तीसरे पर काम चल रहा है

ऑलब्राइट ने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तान के दावे के विपरीत उनकी दूसरी भट्टी की क्षमता सैंकड़ों थर्मल मेगावाट की है और तीसरी भट्टी भी उसी क्षमता की है और इससे निकले प्लूटोनियम से पाकिस्तान अपने हथियारों को काफ़ी बेहतर बना सकता है.

शाहीन
पाकिस्तान अब कई मीसाइल परीक्षण कर चुका है

जानकारों का कहना है कि प्लूटोनियम पर आधारित परमाणु हथियार काफ़ी हल्के होते हैं और कहीं ज़्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं और थिंक टैंक का दावा है कि संभव है कि पाकिस्तान ये हल्के हथियार अपने क्रूज़ मिसाइलों पर फ़िट करने के लिए बना रहा हो.

ऑलब्राइट का ये भी दावा है कि ये जितनी भट्टियां हैं उनमें किसी पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी की निगरानी नहीं है और पिछले छह सालों में पाकिस्तान जिस तेज़ी से अपना कार्यक्रम आगे बढ़ा रहा है उससे लगता है कि वो परमाणु हथियारों के लिए भारी मात्रा में प्लूटोनियम जुटाने की कोशिश में है.

पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को बहुत करीब से जाननेवाले ब्रिगेडियर नईम अहमद सलिक इन दिनों अमरीका के स्कूल ऑफ़ एडवांसड इंटरनेशनल स्टडीज़ में प्रोफ़ेसर हैं और वो इस रिपोर्ट पर कई सवाल उठाते हैं.

अलग-अलग विश्लेषण

उनका कहना है, "सैटेलाइट तस्वीरों से किसी ढांचे का अंदाज़ा तो लग सकता है, लेकिन उसकी क्षमता क्या होगी, वो किस मतलब से बनाया गया है ये कहना मुश्किल है और इसके अलग अलग विश्लेषण हो सकते हैं. इसलिए ये रिपोर्ट एक अनुमान पर आधारित रिपोर्ट है."

 सैटेलाइट तस्वीरों से किसी ढांचे का अंदाज़ा तो लग सकता है, लेकिन उसकी क्षमता क्या होगी, वो किस मतलब से बनाया गया है ये कहना मुश्किल है और इसके अलग अलग विश्लेषण हो सकते हैं. इसलिए ये रिपोर्ट एक अनुमान पर आधारित रिपोर्ट है
ब्रिगेडियर नईम अहमद सलिक

इसके जवाब में ऑलब्राइट ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने तस्वीरों के विश्लेषण के लिए एक ऐसे विशेषज्ञ की मदद ली जो पचास सालों से इस तरह का काम कर रहे हैं".

ऑलब्राइट कहते हैं, "हमें इस बात से भी मदद मिली कि ये तीसरा ढांचा बिल्कुल दूसरे की तरह है और इसलिए इसकी क्षमता का अनुमान लगाना आसान था. लेकिन हम कितना सही हैं इसकी पुष्टि तो तभी हो पाएगी जब हमें पाकिस्तान सरकार का जवाब मिले और हमे उस जवाब का इंतज़ार है".

फ़िलहाल पाकिस्तान सरकार का कोई बयान नहीं आया है और अमरीकी विदेश मंत्रालय ने भी संपर्क किए जाने पर कोई प्रतिक्रिया देने से इंकार किया.

इस रिपोर्ट में ऑलब्राइट ने भारत पर भी निशाना साधा है और कहा है कि भारत अमरीका परमाणु समझौते पर जो बहस चल रही है उससे भी आभास मिलता है कि भारत भी अपने परमाणु भंडार को बढ़ाना चाहता है और पहले से ही मौजूद परमाणु हथियारों में और बढ़ोतरी करना चाहता है.

भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु ताक़त माने जाते हैं और दोनों ही बार बार दावा करते रहे हैं कि वो अपनी ज़िम्मेदारियां समझते हैं.

लेकिन इस रिपोर्ट से एक बार फिर वो आवाज़ें बुलंद होंगी जो लगातार इन दोनों देशों के परमाणु इरादों पर लगाम कसने की बात करती रही हैं.

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