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राष्ट्रपति चुनाव को लेकर वार्ताओं का दौर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में राष्ट्रपति पद को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ तेज़ हो गई है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके नेता करुणानिधि बुधवार को दूसरे दौर की बातचीत के लिए दिल्ली पहुँच रहे हैं. इस दौरान उनकी वामपंथी नेताओं और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से बातचीत होगी. इधर मंगलवार को वामपंथी दलों के नेताओं की अहम बैठक हुई जिसके बाद कहा गया कि बुधवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि से बातचीत के बाद उम्मीदवार के बारे में फ़ैसला किया जाएगा. सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत ने कहा कि वामपंथी दलों ने अपनी पसंद-नापसंद पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष को बता दी है. कारत ने कहा कि वामपंथी दल अपने पुराने रुख़ पर कायम हैं कि राष्ट्रपति अनुभवी राजनीतिज्ञ और धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए. साथ ही वो विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सामंजस्य बनाकर चल सके. उनका कहना था कि अभी तक यूपीए की ओर से किसी उम्मीदवार के नाम की औपचारिक सूचना नहीं मिली है. जयललिता पलटीं दूसरी ओर अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता ने मंगलवार को कहा कि वो राष्ट्रपति पद के लिए उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत की निर्दलीय उम्मीदवारी का समर्थन नहीं कर रही हैं. ग़ौरतलब है कि भैरोसिंह शेखावत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के बजाए स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकते हैं.
उनका कहना था कि तीसरे मोर्चे के नेता 18 जून को बैठक कर राष्ट्रपति चुनाव के बारे में रणनीति तैयार करेंगे. जयललिता ने उन ख़बरों का खंडन किया कि वो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में शेखावत की दावेदारी के लिए आमराय बनाने की कोशिश कर रही हैं. तीसरे मोर्चे के नेता 18 जून को बैठक कर राष्ट्रपति के उम्मीदवार के बारे में फ़ैसला करेंगे. इस बैठक में मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह, चंद्रबाबू नायडू, बाबूलाल मरांडी, ओम प्रकाश चौटाला, वाइको और पीसी थामस शामिल होंगे. मायावती का समर्थन उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने घोषणा कर दी है कि राष्ट्रपति पद के चुनाव में उनकी पार्टी यूपीए के प्रत्याशी का समर्थन करेगी.
मायावती ने यूपीए की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी के नाम को बताने से मना कर दिया और कहा कि इसकी घोषणा यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से की जाएगी. राजनीतिक दलों के बीच इस मसले पर कोई आम सहमति बनती नज़र नहीं आ रही है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के बीच गतिरोध जारी है. ख़बरें हैं कि कांग्रेस की ओर से शिवराज पाटिल का नाम अब सबसे आगे है. हालांकि उनके नाम पर यूपीए के कुछ घटक दलों को आपत्ति है और बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दल भी उनके नाम पर सहमत नहीं हैं. वामपंथी दल विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी को समर्थन देने को तैयार हैं लेकिन कांग्रेस ने इसमें ज़्यादा रुचि नहीं दिखाई हैं. उल्लेखनीय है कि यूपीए और वाम दलों के पास 5.2 लाख मत हैं जबकि एनडीए के पास 3.5 लाख और अन्य क्षेत्रीय दलों के पास 1.2 लाख मत हैं. मौजूदा राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है. |
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