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पहले दिन निराश लौटे सैनिकों के परिजन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 युद्ध के दौरान लापता हुए 54 भारतीय सैनिकों के परिवारवालों ने लाहौर जेल का दौरा किया है. इन परिवारों ने कई रिकॉर्ड पढ़े और जेल गए. लेकिन लाहौर जेल के दौरे में इन्हें कोई सफलता नहीं मिल पाई. भारत से कई परिवार अपने रिश्तेदारों को ढूँढने की आस में पाकिस्तान आए हुए हैं. इन परिवारों का मानना है कि लापता हुए 54 सैनिकों में से कई अब भी ज़िंदा हैं और पाकिस्तान में बंद हैं. अपने भाई को ढूँढने पाकिस्तान आए जीएस गिल ने बताया, "पाकिस्तान के कई लोगों से हमें जानकारी मिली है कि हमारे रिश्तेदार विभिन्न जेलों में बंद हैं. जेल में हम कई भारतीय क़ैदियों से मिले लेकिन इनमें से कोई भी युद्धबंदी नहीं था." तलाश जारी पाकिस्तान सरकार इस बात से इनकार करती आई है कि उसने अब भी कई भारतीय युद्धबंदियों को क़ैद किया हुआ है. इसी बात को साबित करने के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने भारतीय परिवारों को वहाँ आने की अनुमति दी है. शांति वार्ता के तहत पाकिस्तान ने अपने 10 जेलों को भारतीय से आए लोगों के लिए खोलने का फ़ैसला किया है. ये लोग एक से 13 जून के बीच पाकिस्तान की कई जेलों का दौरा कर अपने परिजनों को ढूंढने की कोशिश करेंगे. इन परिवारवालों का कहना है कि जब सैनिकों को पकड़ा गया होगा, तो हो सकता है कि इन्हें कोई और नाम दे दिया गया हो या फिर इतने साल जेल में रहने के बाद ये सैनिक अपनी पहचान भूल गए हों और अपनों के आने का इंतज़ार कर रहे हों. पाकिस्तान की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तसनीम असलम ने बताया, मानवीय आधार पर हमने भारतीय लोगों को यहाँ आने के लिए कहा है कि ताकि वे ख़ुद देख सकें. | इससे जुड़ी ख़बरें पाकिस्तान में अपनों की तलाश01 जून, 2007 | भारत और पड़ोस 'सबसे ज़्यादा मृत्युदंड पाकिस्तान में'27 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस अमरिंदर का अनुरोध, 21 क़ैदी रिहा हुए17 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तानी क़ैदियों की उम्मीद नहीं टूटी है13 अक्तूबर, 2003 को | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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