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पाकिस्तानी क़ैदियों की उम्मीद नहीं टूटी है
बुरे वक़्त ने अभी उनका पीछा नहीं छोड़ा है. उनमें से ज़्यादातर का कहना है कि वे रास्ता भटक गए थे और पहुँच गए भारतीय सीमा में जहाँ उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. इस बात को बरसों गुज़र चुके हैं लेकिन अँधेरी गली के बाद उन्हें उजाले की कोई किरण नज़र नहीं आ रही है. पाकिस्तान के 13 लोग भारत में इस आस में बैठे हैं कि राजस्थान की जेलों में बरसों गुज़ारने के बाद अब उन्हें घर जाने की इजाज़त मिल जाएगी लेकिन सारा दारोमदार दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग पर टिका हुआ है. उच्चायोग की तरफ़ से हो रही देरी से ये लोग ख़ासे नाराज़ हैं जिस पर वे अलवर में पिछले सप्ताह एक दिन की भूख हड़ताल भी कर चुके हैं. अधिकारियों ने हालाँकि भरोसा दिलाया है कि जैसे ही काग़ज़ात का काम पूरा हो जाता है उन्हें वापस पाकिस्तान भेज दिया जाएगा. 13 पाकिस्तानी क़ैदियों को केंद्र सरकार के निर्देश पर राजस्थान की विभिन्न जेलों से गत 18 सितंबर को अलवर लाया गया था. ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों निर्देश दिया था कि पाकिस्तान के जो क़ैदी भारत में अपनी सज़ा पूरी कर चुके हैं उन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाना चाहिए. नरमी आई केंद्र सरकार ने इन क़ैदियों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 109 के तहत लगाए गए आरोप भी वापस लेने के निर्देश दिए थे. इन क़ैदियों की सज़ा पूरी होने के बाद उन्हें इसी धारा के तहत क़ैद रखा जाता है. लेकिन जेलों से मुक्ति मिलने के बाद भी अभी उनकी मुश्किलें दूर नहीं हुई हैं. अलवर के ज़िला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि इन क़ैदियों ने इसलिए भूख हड़ताल की कि देरी भारत सरकार की तरफ़ से हो रही है लेकिन हमने उन्हें पूरा भरोसा दिलाया है कि केंद्र सरकार से निर्देश मिलने पर उन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाएगा.
अलवर के ज़िलाधिकारी एसआर प्रतिहर ने बीबीसी को बताया है कि पाकिस्तानी उच्चायोग इन लोगों की शिनाख़्त कर रहा है जिसमें देर लग रही है. ज़िलाधिकारी प्रतिहर कहते हैं कि इन सारे लोगों को एक खुले माहौल में रखा गया है और ये लोग आपस गपशप, हँसी-मज़ाक करके अपना वक़्त गुज़ारते हैं. इनमें ज़्यादातर लोगों को जासूसी करने के इल्ज़ाम में गिरफ़्तार किया गया था और क़रीब सारे ही लोग अपनी सज़ा काट चुके हैं. हिचकिचाहट ऐसे लोगों को स्वीकार करने में अधिकतर देश हिचकिचाते हैं क्योंकि उन पर जासूसी के आरोप होते हैं. ऐसा ही पाकिस्तानी जेलों में बंद भारतीय लोगों के बारे में हुआ था. असल में ऐसे लोगों की क़िस्मत इस पर टिकी होती है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध किस करवट बैठते हैं. इनमें से कुछ लोगों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और मानवाधिकार संगठनों का दरवाज़ा भी खटखटाया था लेकिन राहत तभी मिली जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दख़लअंदाज़ी की. अब से पहले ऐसे दो पाकिस्तानी भारतीय जेलों में दम तोड़ चुके हैं लेकिन पाकिस्तानी उच्चायोग की तरफ़ से उनके अंतिम संस्कार में कोई शामिल नहीं हुआ था. एक ऐसा ही लड़का मुनीर इस मामले में ख़ुशक़िस्मत था और उसे क़रीब डेढ़ महीने में ही भारत से पाकिस्तान भेज दिया गया था लेकिन इसके लिए मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ ने काफ़ी मेहनत की थी. मुनीर भी पाकिस्तान के बहावलपुर ज़िले में गायें चराते-चराते राजस्थान के गंगानगर ज़िले में भारतीय सीमा में पहुँच गया था. |
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