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पाकिस्तान में अपनों की तलाश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
युद्ध के दौरान लापता हुए भारतीय सैनिकों के रिश्तेदारों का एक दल पाकिस्तान पहुँच गया है. इनका मानना है कि उनके परिजन वहाँ की जेलों में अभी भी बंद हैं. उन्हें उम्मीद है कि उनके परिजन युद्ध के दौरान बंदी बना लिए गए और वे अभी भी पाकिस्तानी जेलों में क़ैद हैं. रिश्तेदारों के दल की अगुआई कर रहे सेवानिवृत्त लेफ़्टिनेंट कर्नल जीएस गिल ने बीबीसी से कहा कि वो बहुत उम्मीद लेकर यहाँ आए हैं. हालाँकि पाकिस्तान सरकार इस बात से साफ इनकार करती रही है कि कोई भी भारतीय युद्धबंदी वहाँ के जेलों में है. इसी बात को साबित करने के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने भारतीय परिवारों को वहाँ आने की अनुमति दी है. ये लोग एक से 13 जून के बीच पाकिस्तान की कई जेलों का दौरा कर अपने परिजनों को ढूंढने की कोशिश करेंगे. उम्मीद गुजरात के दिलीप सिंह राठौर इन्हीं लोगों में से एक हैं. उनका कहना है, "मेरा भाई कैप्टन कल्याण सिंह राठौर 1971 की लड़ाई लड़ा था. सेना का टेलीग्राम आया कि वो लापता है. इसके बाद शिमला समझौता हुआ और युद्धबंदियों की अदला-बदली हुई लेकिन मेरा भाई नहीं लौटा." उन्हें लगता है कि उनका भाई अभी भी पाकिस्तान की किसी न किसी जेल में क़ैद है. इन लोगों ने गुरुवार को भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी से भी मुलाक़ात की. दूसरी ओर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तसनीम असलम कहती हैं कि ऐसा कोई युद्धबंदी वहाँ की जेलों में नहीं है. फिर पाकिस्तान ने इस तरह की अनुमति क्यों दी, इस पर उनका कहना है, "भारत की ओर से बार-बार इस तरह का अनुरोध किया गया. इसलिए मानवीय आधार पर यह फ़ैसला किया गया ताकि संबंधित लोग जेलों में जाकर ख़ुद बंदियों की सूची वगैरह देख लें." आरोप-प्रत्यारोप गुमशुदा सैनिकों के परिजनों का संगठन बनाने वाले लेफ़्टिनेंट कर्नल राजकुमार पट्टू का दावा है कि कई भारतीय युद्धबंदी अभी भी पाकिस्तानी जेलों में हैं. ख़ुद तीन बार युद्ध लड़ चुके लेफ़्टिनेंट पट्टू कहते हैं, "पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो कह चुकी हैं कि वहां के जेलों में 41 भारतीय युद्धबंदी हैं और यह बात उन्होंने सार्क सम्मेलन के दौरान कही थी." लेकिन तसनीम असलम इस बात से साफ़ इनकार करती हैं. उनका कहना है, "यह बिल्कुल बेबुनियाद बात है. किसी ने भी इस तरह की बात नहीं की है." सवाल उठता है कि अगर कोई भारतीय युद्धबंदी वहाँ की जेलों में है भी तो क्या पाकिस्तान इसे स्वीकार करेगा क्योंकि ऐसा करना जिनेवा समझौते के ख़िलाफ़ होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरिंदर का अनुरोध, 21 क़ैदी रिहा हुए17 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस हज़ारों क़ैदियों को मुक्तिदाता की प्रतीक्षा23 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस चरख़ी जेल के क़ैदियों से बातचीत27 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस तीन पाकिस्तानी क़ैदी भूख हड़ताल पर 02 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस पाँच लोग अपनी-अपनी ज़मीन पर लौटे09 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस एक भारतीय सैनिक की दुखभरी कहानी29 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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