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शनिवार, 02 जून, 2007 को 00:19 GMT तक के समाचार
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गोवा विधानसभा चुनाव, मतदान संपन्न
मुख्यमंत्री राणे
मुख्यमंत्री को इसबार कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है
भारतीय राज्य गोवा में नई विधानसभा के गठन के लिए मतदान समाप्त हो गया है.

विधानसभा की 40 सीटों के लिए मुख्य मुक़ाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच है.

हालांकि चुनाव आयोग की सख़्ती और कड़ाई से नियमों का पालन कराए जाने के चलते चुनाव प्रचार का अपेक्षित रंग देखने को नहीं मिला.

भाजपा की कोशिश होगी कि इस चुनाव में जीत से देशभर में विधानसभा चुनावों में अपनी बढ़त के क्रम को वो फिर से आगे लेकर जाएँ.

भाजपा को इसी वर्ष उत्तराखंड और पंजाब के विधानसभा चुनावों में अच्छी बढ़त मिली है. हालांकि उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन ख़राब ही रहा.

उधर कांग्रेस के लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण स्थिति है और उसे राज्य में भारतीय जनता पार्टी से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.

चुनाव

राज्य की कुल 40 विधानसभा सीटों के लिए मतदान का काम शनिवार को संपन्न होना है.

 इसबार के चुनावों में कई दिग्गजों का भविष्य दांव पर है. कई पूर्व मुख्यमंत्रियों और मंत्रिमंडल के सदस्यों, विधायकों को अपनी सीट बचाने के लिए कड़ा संघर्ष देखना पड़ रहा है
पत्रकार संदेश प्रभुदेसाई

इस बार के चुनाव में 202 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें से 15 महिला प्रत्याशी भी मैदान में हैं.

इस बार 10 लाख से ज़्यादा मतदाता इन प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे. इनमें महिलाओं और पुरुषों की संख्या लगभग बराबर ही है.

मतदान संपन्न कराने के लिए कुल 1066 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और इनपर 1500 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की मदद से मतदान होना है.

मतदाता का मौन

गोवा विधानसभा
गोवा विधानसभा के लिए इसबार कई दिग्गजों की राह आसान नहीं होगी

इन चुनावों में एक बात जो सभी लोगों को हैरान कर रही है, वो यह है कि इस बार मतदाताओं की ओर से कोई भी स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहा है.

कुछ प्रेक्षकों का मानना है कि मतदाता का यह रवैया इस बात का संकेत हो सकता है कि वे उन्हें हटाना चाहते हैं जो इस वक्त प्रभावशाली बने हुए हैं.

गोवा से स्थानीय पत्रकार संदेश प्रभुदेसाई ने बीबीसी को बताया, “इसबार के चुनावों में कई दिग्गजों का भविष्य दांव पर है. कई पूर्व मुख्यमंत्रियों और मंत्रिमंडल के सदस्यों, विधायकों को अपनी सीट बचाने के लिए कड़ा संघर्ष देखना पड़ रहा है.”

शहर ही नहीं, ग्रामीण मतदाता भी इस बार अपने रुख को लेकर चुप्पी साधे हुए है जिस कारण चुनाव के बारे में कुछ भी कयास लगाना प्रेक्षकों के लिए भी आसान नहीं नज़र आ रहा है.

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