|
गुरु गोविंदसिंह से माफ़ी मांगी डेरा ने | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सिखों के साथ कई दिनों से चल रहे विवाद के बाद रविवार को डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह ने गुरु गोविंद सिंह से माफ़ी मांगी. एक संक्षिप्त बयान में उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह के जैसा दिखने या उनकी नकल करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी. बयान में कहा गया है कि उन्होंने इस मामले पर हुई घटनाओं पर पहले ही खेद व्यक्त कर दिया था लेकिन लोगों के हित और शांति के लिए वे गुरु गोविंद सिंह से माफ़ी मांगते हैं. इस पर अपनी प्रतिक्रिया में अकाल तख़्त ने कहा है कि तख़्त के जत्थेदार इस पर कोई फ़ैसला करेंगे. समाचार एजेंसियों के साथ बातचीत में जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती ने कहा कि उन्हें अभी कोई बयान नहीं मिला है. रणनीति जोगिंदर सिंह ने कहा, "लगता यही है कि बयान पर किसी के हस्ताक्षर नहीं हैं. पहले तो बयान पर डेरा प्रमुख के हस्ताक्षर होने चाहिए. इसके बाद ही अकाल तख़्त इस पर आगे की रणनीति तय करेगा." डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह के कथित रूप से गुरु गोविंद सिंह जैसा लिबास पहनने को लेकर विवाद शुरू हुआ था. पंजाब में इसके विरोध में उग्र प्रदर्शन हुए तो डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी भी सड़कों पर उतर आए. कई जगह दोनों गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई. बाद में अकाल तख़्त ने डेरा सच्चा सौदा को पंजाब से अपने डेरे बंद करने के लिए रविवार तक की समयसीमा दी थी और 22 मई को पंजाब बंद. रविवार को पंजाब में स्थिति शांतिपूर्ण रही. किसी तरह की हिंसा की कोई ख़बर नहीं. राज्य सरकार ने सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की थी. संवेदनशील इलाक़ों में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी लगाए गए थे. वैसे इस मामले में डेरा प्रमुख ने पहले भी खेद व्यक्त किया था और कहा था कि सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करने का उनका कभी कोई इरादा नहीं था. विवाद दरअसल गुरमीत राम रहीम को कथित रूप से एक विज्ञापन में सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह की वेशभूषा में दिखाया गया था जिससे सिख समुदाय में भारी नाराज़गी थी.
इसके बाद सिख समुदाय के लोगों और डेरा सच्चा सौदा समर्थकों के बीच राज्य के कुछ स्थानों पर हिंसक झड़पें हुईं और बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार को भारी तादाद में अर्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी थी. विवाद के ज़ोर पकड़ने के बाद 17 मई को तलवंडी में सिख समुदाय की एक बड़ी सभा में हुक्मनामा जारी किया गया था कि डेरा सच्चा सौदा का सामाजिक-राजनीतिक और धार्मिक बहिष्कार किया जाए. भटिंडा में तो गुरमीत बाबा राम रहीम सिंह के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए के तहत मामला भी दर्ज किया है. उन पर किसी धर्म या उसकी मान्यताओं का अपमान कर वर्ग विशेष की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे का आरोप लगाया गया है. लेकिन 20 मई को अमृतसर में अकाल तख़्त की बैठक में माँग की गई कि 27 मई तक राज्य में डेरा सच्चा सौदा की सब शाखाएँ बंद कर दी जाएँ. साथ ही 22 मई को प्रदेश में बंद का आह्वान भी किया गया. ऐसा पहली बार था कि अकाल तख़्त ने राज्य में बंद बुलाने का आह्वान किया. | इससे जुड़ी ख़बरें डेरा को अल्टीमेटम का अंतिम दिन27 मई, 2007 | भारत और पड़ोस डेरा-सिख विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुँचा25 मई, 2007 | भारत और पड़ोस डेरा ने भेजा माफ़ीनामे का नया प्रारूप24 मई, 2007 | भारत और पड़ोस डेरा-सिख विवाद सुलझाने के प्रयास तेज़23 मई, 2007 | भारत और पड़ोस क़ानून व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण22 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'हालात बिगड़े तो सरकार होगी ज़िम्मेदार'22 मई, 2007 | भारत और पड़ोस डेरा सच्चा सौदा माफ़ी माँगे - बादल21 मई, 2007 | भारत और पड़ोस क्या है डेरा सच्चा सौदा?18 मई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||