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पाकिस्तान ने तस्करी के आरोप नकारे
शांतिरक्षक
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दोषी शांतिरक्षकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी
पाकिस्तान ने अपने शांतिरक्षक सैनिकों पर कांगो में नियुक्ति के दौरान सोने की तस्करी में लिप्त होने और चरमपंथी संगठनों को हथियार मुहैया कराने के आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल वाहिद अरशद ने बीबीसी से कहा, ''संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले की जाँच में अब तक किसी देश का नाम नहीं लिया है.''

वहीं बीबीसी ने बुधवार को ख़बर दी थी कि हो सकता है कि राजनीतिक कारणों से मामले की जाँच रोक दी गई हो.

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि उसके अभियानों के दौरान अनुशासन का पूरा ध्यान रखा जाएगा.

स्थानीय मिलिशिया के एक शीर्ष कमांडर ने अपना नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी को टेलीफ़ोन कर पुष्टि की कि उनके कुछ साथी सैनिक संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षकों के साथ मिलकर सोने की तस्करी करते थे.

उन्होंने यह भी बताया कि शांतिरक्षक उन्हें विरोधी चरमपंथी गुटों से लड़ने के लिए हथियार भी मुहैया कराते थे.

खदान में काम करने वालों की एसोसिएशन के अध्यक्ष लिकी लिकांबो ने भी बीबीसी को बताया कि उन्होंने एक पाकिस्तानी शांतिरक्षक सैनिक को सोने की तस्करी करते हुए अपनी आंखों से देखा है.

आरोप

बुधवार को बीबीसी संवाददाता मार्टिन प्लाउट ने कहा था कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तानी शांतिरक्षकों पर तस्करी के आरोप पर संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2006 की शुरुआत में एक आंतरिक जाँच का आदेश भी दिया था.

आरोपों के अनुसार कांगो में चरमपंथी गुटों को निरस्त्र कर शांति स्थापित करने के लिए भेजे गए पाकिस्तानी शांतिरक्षक सैनिक इन गुटों के साथ ही सोने की तस्करी में ही लिप्त हो गए और सोने के बदले हथियारों की आपूर्ति करने लगे.

जब वर्ष 2005 के अंत में अंतरराष्ट्रीय संस्था ह्यूमन राइट्स वाच ने संयुक्त राष्ट्र को सतर्क किया तो आंतरिक जाँच के आदेश दिए गए.

हालांकि 18 महीने बाद भी इस मामले में संयुक्त राष्ट्र ने कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है.

जाँच से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि सबसे अधिक शांतिरक्षक भेजने वाले पाकिस्तान को अलग-थलग पड़ने से बचाने के लिए जाँच के परिणामों को दबा दिया जा सकता है.

हालांकि बीबीसी के कार्यक्रम के बाद कांगो में संयुक्त राष्ट्र मिशन ने एक बयान जारी कर कहा कि अभी तक जाँच जारी है, इसलिए किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

कांगो में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की हैसियत से काम कर रहे विलियम स्विंग ने इससे पहले कहा था कि अगर संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षकों पर यह आरोप साबित हो जाते हैं कि उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

दूसरी तरफ मेजर जनरल अरशद ने कहा, '' हमारे देश के सैनिकों पर लगाए जा रहे आरोप आधारहीन हैं और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है.''

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार को संयुक्त राष्ट्र की ओर से की गई जाँच के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है.

मेजर जनरल अरशद ने कहा,''अगर कोई समस्या होती तो संयुक्त राष्ट्र की ओर से पाकिस्तान सरकार को जरूर इसकी सूचना दी जाती. कोई रिपोर्ट मिलने के बाद ही हम इस पर कुछ कह सकते हैं.''

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