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मुंबई में विशाल धर्मांतरण कार्यक्रम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में रविवार को हज़ारों आदिवासी और दलित हिंदू धर्मांतरण करके बौद्ध धर्म अपनाने जा रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि आधुनिक भारत के इतिहास का सबसे बड़ा धर्मांतरण होगा. जस्टिस पार्टी के अध्यक्ष उदित राज का कहना है कि धर्मांतरण करने वालों की संख्या एक लाख तक हो सकती है. उन्होंने कहा, "दलितों को इज्जत तभी मिलेगी जब वे मौजूदा सामाजिक वर्ण व्यवस्था से बाहर निकलेंगे. इसीलिए दलित-आदिवासी बौद्ध धर्म अपना रहे हैं." संभावना है कि तिब्बत के निर्वासित नेता दलाई लामा इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे. कुछ दक्षिणपंथी हिंदू संगठन इस तरह के धर्मांतरणों का विरोध करते रहे हैं. धर्मांतरण करने वालों को उम्मीद है कि इसके ज़रिए वे उस जातिप्रथा से बाहर निकल सकेंगे जिसमें उन्हें सबसे निचले तबके का माना जाता है. हालांकि सरकार ने दलितों और आदिवासियों को आरक्षण देने की व्यवस्था की है लेकिन इससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बहुत सुधार नहीं हुआ है. वैसे भारत में धर्मांतरण एक विवादित विषय रहा है. विशेषकर अगर वह हिंदू से इस्लाम या ईसाइयत में धर्मांतरण हो. हालांकि हिंदुओं के बौद्ध हो जाने का अब तक ख़ास विरोध नहीं हुआ है क्योंकि बौद्ध धर्म को एक तरह से हिंदू धर्म का ही विस्तार माना जाता है. | इससे जुड़ी ख़बरें दलितों ने माँगा पूजा का अधिकार12 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस वर्तमान दलित आंदोलन का स्वरूप05 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सैंकड़ों दलितों ने धर्मांतरण किया14 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस मध्यप्रदेश में धर्मांतरण क़ानून बदला26 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस राजस्थान में धर्मांतरण पर विवाद25 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'धर्मांतरण के ख़िलाफ़ क़ानून बने'20 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस धर्मांतरण के आरोप पर हंगामा17 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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