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मध्यप्रदेश में धर्मांतरण क़ानून बदला

धर्मांतरण
अब पुलिस जाँच के बाद ही धर्म परिवर्तन की अनुमति मिल पाएगी
भारत के मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने धर्म परिवर्तन से संबंधित क़ानून में संशोधन किया है जिसके बाद धर्म परिवर्तन के लिए पहले प्रशासन की अनुमति लेनी होगी.

क़ानून में संशोधन के बाद व्यवस्था की गई है कि धर्म परिवर्तन के इच्छुक व्यक्ति को धर्म बदलने की अनुमति पुलिस जाँच के बाद दी जाएगी.

मध्यप्रदेश धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अपना धर्म परिवर्तन करने से एक माह पहले ज़िला प्रशासन को सूचना देनी होगी.

राज्य में पिछले 38 सालों से मौजूद पुराने क़ानून के तहत किसी व्यक्ति को धर्मांतरण करने के बाद एक महीने के भीतर प्रशासन को इसकी सूचना देनी होती थी.

नए विधेयक में धर्म परिवर्तन करवाने वाले धार्मिक गुरुओं को भी पहली बार क़ानून के दायरे में लाया गया है.

अब उन्हें किसी का धर्म परिवर्तन कराने से 15 दिन पहले इसकी सूचना ज़िला प्रशासन को देनी होगी.

ऐसा न करने की सूरत में उन्हें पाँच हज़ार रुपए जुर्माना या एक साल की क़ैद की सज़ा हो सकती है.

क़ानून के तहत इस तरह की सूचना प्राप्त होने पर ज़िला प्रशासन पुलिस जाँच कराएगा कि जो धर्म परिवर्तन हो रहा है उसके लिए किसी प्रकार का ‘बल, प्रलोभन या कपटपूर्ण साधनों’ का इस्तेमाल तो नहीं किया गया है.

मानवाधिकार संगठनों से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता लज्जाशंकर हरदेनिया का कहना है कि इस प्रावधान की आड़ में पुलिस प्रशासन धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों पर दबाव बना सकता है.

दबाव की आशंका

हरदेनिया ने आगे कहा, "यह मत भूलिए कि धर्मांतरण करने वाले लोग मुख्यतः समाज के शोषित वर्गों से होते हैं जिनपर दबाव बनाना आसान है."

राज्य सरकार की विज्ञप्ति में कहा गया है, "अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन के बाद स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन को ही अनुमति दी जा सकेगी. ग़ैर क़ानूनी धर्म परिवर्तन को मान्य नहीं किया जाएगा."

 यह मत भूलिए कि धर्मांतरण करने वाले लोग मुख्यतः समाज के शोषित वर्गों से होते हैं जिनपर दबाव बनाना आसान है
समाजसेवी हरदेनिया

कई हलकों में यह शंका भी जताई जा रही है कि इस तरह की सूचना का दुरुपयोग बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच जैसे हिंदूवादी संगठन कर सकते हैं.

मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद से ये संगठन बार-बार धर्मांतरण का मुद्दा उठाते रहे हैं.

साथ ही चर्च पर हमले और ईसाई धर्म गुरूओं के साथ धर्मांतरण कराने के नाम पर दुर्व्यवहार की ख़बरें भी आती रही है.

ईसाई संगठन कैथोलिक काउंसिल ऑफ बिशप के प्रवक्ता आनंद मुतुग्गल कहते हैं कि यह विधेयक धार्मिक कटुता को बढ़ावा देगा और यही इस सरकार की मंशा भी है.

मगर आनंद मतुग्गल इस विधेयक को पास किए जाने में विपक्षी दल काँग्रेस की भी मिलीभगत मानते हैं.

राज्य की विपक्षी काँग्रेस पार्टी के विधायक विधेयक पेश किए जाने के थोड़ी देर पहले ही एक मामूली मुद्दे पर सदन से बर्हिगमन कर गए.

इस बीच सत्ताधारी पार्टी ने विधेयक सदन में पेश कर दिया और यह बिना किसी चर्चा के पारित हो गया.

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