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शुक्रवार, 02 जून, 2006 को 10:42 GMT तक के समाचार
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छत्तीसगढ़ में बनेगा नया धर्मांतरण क़ानून

धर्मांतरण
धर्मांतरण पर छत्तीसगढ़ में पहले से ही क़ानून बना हुआ है
राजस्थान में धर्मांतरण क़ानून को लेकर उठा विवाद अभी थमा भी नहीं है कि छत्तीसगढ़ की सरकार इसी विषय पर एक नया क़ानून लाने जा रही है.

छत्तीसगढ़ में पहले से ही धर्मांतरण की स्वतंत्रता के दुरुपयोग को लेकर एक क़ानून ‘धत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम’ मौजूद है.

गृह मंत्री रामविचार नेताम का कहना है कि नया क़ानून धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की तर्ज़ पर ही होगा लेकिन उसमें इस मौलिक अधिकार के दुरुपयोग पर सख्त क़ानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा.

नेताम ने बीबीसी से कहा कि यह क़ानून राजस्थान और तमिलनाडु में लाए गए धर्मांतरण क़ानून की तर्ज़ पर होगा और इसे जून में शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में चर्चा के लिए पेश किया जा सकता है.

राजस्थान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी द्वारा लाए गए विधेयक में ‘‘लालच, बलपूर्वक या धोखे’’ से करवाए गए धर्मांतरण के मामलों में दोषियों को पाँच साल तक की कैद या 50 हज़ार रुपए के जुर्माने का प्रस्ताव है.

लेकन इस विधेयक को अब तक राज्यपाल की मंज़ूरी नहीं मिल पाई है.

तमिलनाडु में भी विरोध के कारण धर्मांतरण क़ानून लागू नहीं किया जा सका था और हाल में ही गठित डीएमके सरकार ने इसे निरस्त करने का ऐलान किया है.

भारत में फिलहाल मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और अरुणाचल प्रदेश में धर्मांतरण से संबंधित क़ानून मौजूद है.

सज़ा का प्रावधान

छत्तीसगढ़ में मौज़ूदा धर्म स्वतंत्रता क़ानून के तहत 'बल पूर्वक' धर्मांतरण कराने पर किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को एक साल की कैद या पाँच हज़ार रुपए जुर्माना या फिर दोनों सजाएं साथ-साथ दिए जाने का प्रावधान है.

अगर कोई व्यक्ति किसी नाबालिग, महिला, आदिवासी या दलित का धर्मांतरण इस प्रकार करवाता है तो उसे दो साल की कैद अथवा 10 हज़ार रुपए ज़ुर्माना देना पड़ सकता है.

आदिवासी

हालाँकि छत्तीसगढ़ में 'बलपूर्वक या लाभ देकर' करवाए गए धर्मांतरण का कोई मामला हाल के दिनों में सामने नहीं आया है लेकिन गृह मंत्री का कहना है कि आदिवासी इलाकों में ईसाई मिशनरियों द्वारा बड़े पैमाने पर लोगों का मज़हब बदलवाया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ में ‘‘घर वापसी’’ यानि हिंदू से इसाई हो गए लोगों को फिर से हिंदू बनाने का कार्यक्रम काफी विवादित रहा है लेकिन इस विषय को नए धर्मांतरण क़ानून की परिधि से बाहर रखा गया है.

छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों में ईसाई मिशनरियाँ बड़े पैमाने पर कार्यरत हैं और समाज कल्याण के कई कार्यक्रम भी चलाती हैं.

बाद के दिनों में हिंदूवादी संगठन जैसे वनवासी कल्याण आश्रम और हिंदू जागरण मंच आदि का भी इस इलाके में आगमन हो गया.

ईसाई समुदाय इन संस्थाओं पर अपने अनुयाईयों को डराने धमकाने का आरोप लगाते रहे हैं जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी संस्थाओं का कहना है कि ईसाई संस्थाएं प्रलोभन देकर आदिवासियों का धर्म परिवर्तन करवा रही हैं.

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