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राज्यपाल ने विधेयक वापस लौटाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान की राज्यपाल प्रतिभा पाटिल ने धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाए गए एक विधेयक को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया है. राजस्थान विधानसभा ने इस धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक को पिछले महीने मंज़ूरी दे दी थी. हालाँकि विपक्ष ने इसका विरोध किया था. अब राज्यपाल ने विधेयक वापस कर दिया है. जयपुर से बीबीसी संवाददाता नारायण बारेठ के अनुसार कई अल्पसंख्यक संगठनों ने यह कहते हुए विधेयक का विरोध किया है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित कर देगा. कई मानवाधिकार संगठनों ने भी विधेयक का विरोध किया है. पिछले दिनों कुछ ईसाई, मुस्लिम और दलित संगठनों ने विधेयक के विरोध में राजधानी जयपुर में प्रदर्शन भी किया था. विवादास्पद राज्य की भाजपा सरकार का कहना है कि विधेयक का उद्देश्य दबाव में या लालच देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है. विधेयक में ज़बरन या लालच देकर धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति को दो से पाँच साल की जेल की सजा का प्रस्ताव है. दोषी व्यक्ति पर 50 हज़ार रुपये तक का ज़ुर्माना लगाने की भी व्यवस्था है. राजस्थान के क़ानून मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने राज्यपाल के क़दम के बारे में कहा, "राज्यपाल का संवैधानिक दायित्व है कि वो विधानसभा द्वारा पारित विधेयक को स्वीकृति दे." विश्व हिंदू परिषद के राज्य प्रमुख जुगल किशोर ने राज्यपाल के क़दम की आलोचना की है. दूसरी ओर राजस्थान क्रिश्चियन फ़ेलोशिप के फ़ादर कोल्हो और जमाते इस्लामी राजस्थान के प्रमुख सलीम इंजीनियर ने राज्यपाल के क़दम की सराहना की है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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