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दिल्ली में बाल श्रमिक मुक्त कराए गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पुलिस का कहना है कि उन्होंने दिल्ली के करोल बाग इलाक़े से सोने की पॉलिश करनेवाले सौ से अधिक बाल श्रमिकों को मुक्त कराया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ख़बरें मिलीं थीं कि 14 साल से कम उम्र के बच्चे ऐसी काम कर रहे हैं, उसके बाद वहाँ छापे मारे गए. ख़बर है कि ज्यादातर ये बच्चे पश्चिम बंगाल से हैं. इस मामले में ऐसी ही एक इकाई के मालिक से पूछताछ की जा रही है. हालांकि उनका कहना था कि बच्चों से जबरदस्ती काम नहीं कराया जा रहा था. उनका कहना था कि बच्चों के माता पिता ने कमाई के लिए इन बच्चों को स्वेच्छा से भेजा था. ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने एक क़ानून बनाकर सड़कों के किनारे स्थित दुकानों, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बाल मज़दूरी को ग़ैरकानूनी घोषित कर दिया है. इस क़ानून के तहत बाल मज़दूरी के दायरे में 14 वर्ष के कम उम्र के बच्चे शामिल हैं. सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ भारत में लगभग सवा करोड़ बाल मज़दूर हैं लेकिन ग़ैर सरकारी संगठनों के मुताबिक़ यह संख्या छह करोड़ तक हो सकती है. भारत में ख़तरनाक घोषित किए गए उद्योगों में बाल मज़दूरी पर पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है. | इससे जुड़ी ख़बरें तीन में से दो बच्चों के साथ 'दुर्व्यवहार'09 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस हाईकोर्ट ने लापता बच्चों पर रिपोर्ट माँगी03 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस बाल मज़दूरों को रखना हुआ ग़ैरक़ानूनी09 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाल मज़दूरी का अर्थशास्त्र06 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस रोज़गार गारंटी योजना की दिक्कतें01 मई, 2006 | भारत और पड़ोस जानलेवा हो सकता है एसबेस्टस18 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस रोज़गार योजना नहीं, रोज़गार क़ानून02 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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