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रविवार, 06 मई, 2007 को 10:17 GMT तक के समाचार
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तानाशाही तबाह होती है: इफ़्तिख़ार चौधरी
इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी
इफ़्तिख़ार चौधरी लाहौर में रैली को संबोधित किया
पाकिस्तान के निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी ने लाहौर में हज़ारों लोगों को संबोधित करते हुए कहा है कि जो तानाशाह क़ानून को नज़रअंदाज़ करते हैं, वे 'तबाह' हो जाते हैं.

इफ़्तिख़ार चौधरी ने सीधे-सीधे तौर पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का नाम नहीं लिया.

उन्होंने कहा, "संविधान के बजाय जिस देश की बुनियाद तानाशाही पर बनती है, वहाँ न क़ानून का पालन होता है और मूल अधिकारों की भी रक्षा नहीं होती. जो देश अपने अतीत से सबक नहीं लेते और ग़लतियाँ दोहराते हैं, उन्हें इसकी क़ीमत चुकानी पड़ती है."

 "संविधान के बजाय जिस देश की बुनियाद तानाशाही पर बनती है, वहाँ न क़ानून का पालन होता है और मूल अधिकारों की भी रक्षा नहीं होती. जो देश अपने अतीत से सबक नहीं लेते और ग़लतियाँ दोहराते हैं, उन्हें इसकी क़ीमत चुकानी पड़ती है
इफ़्तिख़ार चौधरी

जब इफ़्तिख़ार चौधरी लाहौर हाई कोर्ट पहुँचे तो हज़ारों वकीलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया. इसके अलावा हाई कोर्ट के जज और 18 सेवानिवृत्त जज भी मौजूद थे.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने मार्च में मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी पर अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था.

इफ़्तिख़ार चौधरी के निलंबन के बाद से वकीलों और अन्य लोगों में ख़ासी नाराज़गी है. कई बार वक़ीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं हैं .

1999 में सत्ता में आने के बाद से इसे परवेज़ मुशर्रफ़ के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है.

ज़ोरदार स्वागत

रास्ते में उनका जम कर स्वागत हुआ

निलंबित मुख्य न्यायाधीश ने शनिवार को इस्लामाबाद से सड़कमार्ग के ज़रिए लाहौर की यात्रा शुरु की थी. जब वे रावी नदी को पर कर लाहौर आ रहे थे तो लोगों ने 'मुशर्रफ़ जाओ' के नारे लगाए.

रविवार को लाहौर पहुँचने के बाद इफ़्तिख़ार चौधरी ने एक बड़ी रैली को संबोधिति किया.

रैली को देखते हुए करीब सात हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था.

बीबीसी संवाददाता बारब्रा प्लेट के मुताबिक इफ़्तिख़ार चौधरी न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं लेकिन उनके समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों ने सैन्य शासन के ख़िलाफ़ मुहिम की शक्ल ले ली है.

संवाददाता का कहना है कि वैसे तो इफ़्तिख़ार चौधरी के समर्थन में कई रैलियाँ हो चुकी हैं लेकिन लाहौर का दौरा बेहद अहम है.

लाहौर न सिर्फ़ विधि क्षेत्र से जुड़े लोगों का गढ़ है बल्कि ये शहर परवेज़ मुशर्रफ़ की राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग का गढ़ भी है.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने पहले वकीलों को चेतावनी दी थी कि वे मुद्दे का राजनीतिकरण न करें.

लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इफ़्तिख़ार चौधरी को अपना समर्थन दिया है. लाहौर में कई जगहों पर राजनीतिक दलों ने अपने कैंप लगाए हैं जहाँ इफ़्तिख़ार चौधरी रुक रहे हैं और लोगों से बात कर रहे हैं.

विपक्षी पार्टियों का कहना है कि निलंबित किए गए मुख्य न्यायाधीश की रैली में हिस्सा लेने से रोकने के लिए कई समर्थकों को गिरफ़्तार किया गया.

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