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'चरमपंथियों' के मारे जाने के बाद प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में गठबंधन सेना के एक बयान के मुताबिक नैटो के नेतृत्व वाली सेना और अफ़ग़ान सेना ने पश्चिमी प्रांत हेरात में हुई झड़पों में 136 संदिग्ध तालेबान लड़ाकों को मार दिया है. इस हमले के विरोध में सैकड़ों अफ़ग़ान लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है. उनका कहना है कि मारे गए लोग चरमपंथी नहीं बल्कि आम नागरिक थे. अमरीका विरोधी नारे लगा रहे इन लोगों ने स्थानीय सरकारी मुख्यालय तक मार्च किया. रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालयों में आग लगा दी और पुलिस को गोली भी चलानी पड़ी. एक स्थानीय व्यक्ति ने एएफ़पी को बताया," जो लोग मारे गए हैं वो तालेबानी नहीं हैं, वो आम नागिरक हैं. उन्होंने बच्चों समेत नागरिकों को मारा है." सेना के मुताबिक शिनडैंड ज़िले में रविवार को 14 घंटे लंबी लड़ाई के बाद 87 तालेबान लड़ाके मारे गए हैं. इससे दो दिन पहले हुई लड़ाई में 49 लड़ाके मारे गए थे. लेकिन किसी स्वतंत्र स्रोत या तालेबान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. शिनडैंड हेरात से करीब 120 किलोमीटर दूर है. गठबंधन सेना के प्रवक्ता मेजर क्रिस बेल्चर ने कहा है कि अफ़ग़ान पुलिस ने भी अभियान में हिस्सा लिया. लेकिन समाचार एजेंसी एपी ने शिनडैंड ज़िले के पुलिस प्रमुख के हवाले से लिखा है कि अफ़ग़ान पुलिस या सेना ने अभियान में हिस्सा नहीं लिया. एपी ने पुलिस प्रमुख के हवाले से ये भी लिखा है कि 'बड़ी संख्या में लोग' मारे गए हैं. उल्लेखनीय है कि 2001 में तालेबान सरकार के पतन के बाद से हिंसा अपने चरम पर है. पिछले साल हिंसा की घटनाओं में कम से कम चार हज़ार लोगों की जानें गईं थीं जिनमें से एक चौथाई आम नागरिक थे. इस समय वहाँ तीस हज़ार से अधिक संयुक्त कमान के सैनिक तैनात हैं. ईरानी सीमा पर हेरात प्रांत ईरान की सीमा पर है और अधिकारियों का कहना है कि कुछ समय पहले तक यह इलाक़ा अपेक्षाकृत शांत था. सेना का कहना है कि इस इलाक़े में जब अमरीकी सैनिक, अफ़ग़ान पुलिस और अन्य सैनिकों के साथ गश्त पर थे तो उन पर तालेबान की ओर से गोलाबारी की गई और रॉकेट दागे गए. अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद सेना ने हवाई मदद ली और फिर कई ठिकानों पर हमले किए गए. सेना ने अपने बयान में दावा किया है, "कम से कम 70 सैन्य ठिकाने नष्ट किए गए और 87 तालेबान लड़ाकों की मौत हुई." अभियान उधर अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण में ब्रितानी सेना के नेतृत्व में तालेबान के ख़िलाफ़ एक अभियान शुरु किया गया है. यह अभियान हेलमंद प्रांत की सांगिन घाटी में शुरु किया गया है जहाँ तालेबानी गतिविधियाँ सबसे अधिक हैं. ब्रितानी सेना के साथ चल रहे बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सेना ने अपने साथ बख़्तरबंद गाड़ियाँ ली हुई हैं और हेलिकॉप्टर भी साथ चल रहे हैं. संवाददाता का कहना है कि नैटो और अफ़ग़ानिस्तान की सेना भी साथ चल रही है. इस अभियान में कुल मिलाकर तीन हज़ार से अधिक सैनिक भाग ले रहे हैं और कई जगह गोलीबारी हुई है. | इससे जुड़ी ख़बरें तालेबान ने फ़्रांसीसी राहतकर्मी को छोड़ा28 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस विज्ञापन को लेकर नैटो की निंदा24 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में विस्फोट, छह मरे22 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस तालेबान चरमपंथियों को मारने का दावा19 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ान नागरिक हिंसा से ज़्यादा पीड़ित'16 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस तालेबान लड़ाके सरकारी दफ़्तरों में घुसे07 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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