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काशी में बढ़ रही है चुनावी गर्मी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के छठे चरण की 52 सीटों के लिए चुनावी गर्मी बढती जा रही है. इन सीटों के लिए तीन मई को वोट डाले जाएँगे. छठे चरण में वाराणसी, चन्दौली, गाजीपुर, मिर्ज़ापुर, सोनभद्र, भदोही, जौनपुर, इलाहबाद और कौशांबी ज़िलों की सीटों के लिए विभिन्न पार्टियों के नेताओं की भरपूर कोशिश है कि माहौल मे कुछ गर्मी बढाई जाए. मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, मायावती और नरेंद्र मोदी ने पिछले दो दिनों मे वाराणसी मे जनसभाओं को संबोधित कर, अपनी-अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया. लेकिन मायावती को छो़ड कर वाराणसी मे कोई भी नेता प्रभावशाली जनसभा करने मे कामयाब नही रहा है. मायावती ने शनिवार को यहाँ भारी भीड़ को लगभग तीन घंटे इंतज़ार कराया, पर जब वो आईं तो जमकर बोलीं. माया का असर उनके भाषण बेहद आक्रमक हो रहे हैं. एक ओर जहाँ उन्होंने मुलायम और अमरसिंह को जेल भेजने और दलित समाज को किसी भी सूरत मे अपने वोट डालने के लिए प्रेरित करने जैसी बातें कीं, वहीँ एक बार भाषण बीच मे रोक कर एक पुलिस वाले कि ख़बर ली जो फोन पर बात कर रहा था. मायावती अपने एक अधिकारी को उसका नाम नोट करने का आदेश देती हैं और भीड़ झूम उठती है.
ऐसा कर वो उपस्थित भीड़ को ये भरोसा दिलाने मे कामयाब रहती हैं कि वो ही प्रदेश कि मुख्यमंत्री बनने वाली हैं, रैली से लौटते लोगों की बातचीत सुनकर ये साफ़ हो जाता है. मुलायम ने भी शुक्रवार को वाराणसी का तूफानी दौरा किया पर, उनकी जनसभाओं मे ख़ास भीड नहीं जुट पाई. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा दश्मेश घाट के व्यस्त इलाक़े मे रखी गई पर, इसके बावजूद जनसभाओं मे जुटी भीड़ को साधारण ही कहा जाएगा. मोदी के मुद्दे हालाँकि मोदी की भाषण शैली पर कम भीड़ का कोई प्रतिकूल असर नहीं था. वो आधे घंटे बोले, और मुद्दे वही पोटा, आतंकवाद और अफ़ज़ल को फ़ाँसी, उनकी सभा मे खूब तालियाँ भी बजती हैं. लेकिन मोदी के भाषण मे एक चिंता बहुत साफ़ थी, वो थी मतदान का गिरता प्रतिशत. उन्होने अपील की कि वाराणसी शहर के लोग बढ-चढ कर मतदान मे हिस्सा लें. 30 अप्रैल को राहुल गांधी भी यहाँ रोड शो के लिए आ रहे हैं, अगले दिन सोनिया गांधी भी जनसभा को संबोधित करने वाली हैं. वाराणसी ज़िले मे कुल 6 विधानसभा सीटें हैं और इन सीटों के लिए कुल 90 प्रत्याशी मैदान मे हैं. पिछली बार भाजपा और समाजवादी पार्टी ने तीन-तीन सीटें आपस में बाँटी थी. उलझा गणित लेकिन इस बार दोनो ही पार्टियों का गणित बिगड़ा हुआ नज़र आ रहा है. सपा और बसपा ने सभी छह सीटों पर अपने प्रत्याशी दिए हैं.
जबकि भाजपा और कांग्रेस ने अपने सहयोगियों के लिए 1-1 सीट छोड़ी है. कोलासल से भाजपा के सहयोगी अपना दल के अध्यक्ष सोनेलाल पटेल चुनाव लड़ रहे हैं. फ़िलहाल जो समीकरण वाराणसी में नज़र आ रहे हैं, उससे भाजपा और सपा दोनों के लिए ही अपनी पुरानी स्थिति बनाए रखना कड़ी चुनौती है. जहाँ वाराणसी उत्तर से सपा की विधायक रही राबिया बेगम पार्टी द्वारा टिकट ना दिए जाने पर निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं, वहीं इस क्षेत्र से तीन अन्य मुसलमान उम्मीदवार भी मैदान में हैं जिससे सपा का गणित कुछ गड़बड नज़र आ रहा है. भाजपा ने यहाँ शिवनाथ यादव को टिकट दिया है और हालात को भुनाने की कोशिशों में है. इस विधानसभा क्षेत्र में मुसलमान मतदाताओं के बाद यादवों की संख्या सबसे अधिक है. घाटे में सपा हालाँकि अभी मुसलमान मतदाता ख़ामोश है पर कुल मिलाकर अगर ये वोट बंटता है तो इसका सीधा नुक़सान सपा को होगा. वाराणसी दक्षिण से पाँच बार विधायक रहे भाजपा के श्यामदेव राय चौधरी के लिए सपा के दिलीप डे मुश्किलें पैदा कर रहे हैं.
कुल मिलाकर अगर समीकरण जैसे दिखाई देते हैं वैसा ही वोट पड़ता है तो फ़ायदे का सौदा बसपा के लिए ही है मुद्दों की बात करें तो क़ानून-व्यवस्था का मुद्दा सभी विपक्षी पार्टियों के वक्ताओं के भाषण का केंद्र रहता है. जबकि सपा बेरोज़गारी भत्ता और लड़कियों को दी जाने वाली छात्रवृति को भुनाने के प्रयास में है. पर कुल मिलाकर जातीय समीकरण ही अंतत किसी भी उम्मीदवार की संभावनाएं तय करता नज़र आ रहा है. चुनाव आयोग की सख्ती का असर इस चरण के चुनाव प्रचार पर भी साफ़ नज़र आ रहा है. ये तो नही कहा जा सकता कि आयोग की सख्ती ने धनबल को पूरी तरह से बेअसर कर दिया है, पर प्रत्याशी कम से कम खुल कर पैसा नहीं बहा पा रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें पाँचवें चरण में 46 फ़ीसदी मतदान28 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस यूपी में चौथे चरण का प्रचार समाप्त21 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस यूपी में तीसरे चरण में 50 प्रतिशत मतदान18 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस दूसरे चरण में 45 फ़ीसदी मतदान13 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस यूपी में मतदान हुआ संपन्न07 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस दो समाजवादी दोस्तों की तक़रार17 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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