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गुरुवार, 19 अप्रैल, 2007 को 11:46 GMT तक के समाचार
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तुलसीपुर में एक अलग ही चुनावी जंग

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चुनावी फ़ायदे के लिए धर्म और बाहुबल का इस्तेमाल आम बात हो गई है
महात्मा बुद्ध के जन्म क्षेत्र कपिलवस्तु के क़रीबी इलाक़े में बसे तुलसीपुर में चुनावी गहमागहमी बड़ी दिलचस्प है.

दूसरे राजनीतिक दलों - कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, समाजवादी क्रांति दल के अलावा चुनाव मैदान में हैं भारतीय जनता पार्टी के महंत कौशलेंद्र और बहुजन समाज पार्टी के नौमान ज़हीर.

पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलरामपुर क्षेत्र में अपने बाहुबल के लिए जाने जानेवाले रिज़वान ज़हीर के भाई, स्थानीय मतदाता बहुजन समाज पार्टी उम्मीदवार नौमान ज़हीर का परिचय कुछ ऐसे ही देता है.

देश भर में जब राजनीति में धर्म के इस्तेमाल और राजनीति के अपराधीकरण की बात चल रही हो तब तुलसीपुर की यह चुनावी जंग ग़ौर के क़ाबिल है.

स्थानीय लेखक पवन बख्शी रिज़वान ज़हीर को ख़ुद ही एक राजनीतिक दल मानते हैं क्योंकि वो जिस पार्टी में गए हैं जनाधार उसी पार्टी की ओर खिसका.

 वोट के लिए धर्म का सहारा लेने में राजनैतिक दल जिस तरह हिचकिचाते नज़र नहीं आते उसी तरह आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग भी सियासी पार्टियों में शामिल होने और चुनाव लड़ने में गुरेज़ नहीं करते

पहले बहुजन समाज पार्टी, फिर मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी और अब दुबारा मायावती के साथ आ गए रिज़वान ज़हीर के बारे में उनके अहम कार्यकर्ता नुरुल हुदा ख़ान भी कहते हैं," रिज़वान साहब को राजनीतिक पार्टियों की ज़रूरत नहीं बल्कि पार्टियों को उनकी ज़रूरत है जो उनसे कहती हैं कि आप हमारे साथ आएँ, आपको उचित स्थान मिलेगा."

महंत बनाम बाहुबली

चुनाव में सुरक्षाकर्मी
उत्तर प्रदेश में इस बार चुनाव आयोग ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है

महंत कौशलेंद्र का प्रभाव हिंदू धर्म स्थल देवीपाटन पीठ से आता है जो तुलसीपुर में ही स्थित है.

देवीपाटन का संबंध इस क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण गोरखनाथ पीठ से है जिसके सर्वेसर्वा योगी आदित्यनाथ हैं जो टिकटों के बँटवारे को लेकर भाजपा से नाराज़ हो गए थे लेकिन अब मान गए हैं.

महंत कौशलेंद्र को मिला पार्टी का टिकट इसी सुलह का हिस्सा माना जा रहा है.

योगी आदित्य नाथ का नाम हाल में हुए गोरखपुर हिंदू-मुस्लिम दंगों में भी सामने आया था जिसके बाद मुलायम सिंह सरकार ने उन्हें जेल में डाल दिया था.

भाजपा उम्मीदवार के लिए वोट माँगने के लिए टेलीविज़न अभिनेत्री स्मृति ईरानी को भी बुलाया गया था.

इधर हिंदू मतों के विभाजन को रोकने के नाम पर विश्व हिंदू परिषद् ने साधू-संतों की मदद से एक यात्रा शुरू की है. हालांकि महंत कौशलेन्द्र इसे धर्म के नाम पर वोट जुटाना नहीं मानते बल्कि 'समाज को एक जुट करने की मुहिम' की संज्ञा देते हैं.

नुरुल हुदा ख़ान का कहना है कि भाजपा, विहिप और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पहले भी इस तरह की मुहिम चला चुके हैं लेकिन यह सिर्फ़ राम मंदिर आंदोलन के समय ही कारगर साबित हुआ था.

वैसे दूसरे राजनीतिक दल दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम बुख़ारी की चुनावी मुलाकातों, शंकराचार्यों की पीढ़ी की यात्रा और धार्मिक आयोजनों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं.

 राजनीतिक दलों के लिए चुनाव में ग़ैरकानूनी और दूसरे ग़लत काम करने वाले बाहुबलियों को लगा कि वह यह काम अपने लिए क्यों न करें. एक राजनीतिक दल ने इनके सहारे अपना दबादबा बढ़ाया तो दूसरी पार्टियाँ भी यही करने लगीं.
ईश्वर चंद्र द्विवेदी, इलेक्शन वॉच

इस चुनाव में ही कांग्रेस नेता मौलाना उबैदुल्लाह ख़ान आज़मी समाजवादी पार्टी के लिए मुस्लिमों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं.

हज़रत मोहम्मद का कार्टून बनाने वाले कार्टूनिस्ट की हत्या के लिए इनाम की घोषणा करने वाले समाजवादी पार्टी के हाजी याक़ूब क़ुरैशी ने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बना ली है.

वोट के लिए धर्म का सहारा लेने में राजनैतिक दल जिस तरह हिचकिचाते नज़र नहीं आते उसी तरह आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग भी सियासी पार्टियों में शामिल होने और चुनाव लड़ने में गुरेज़ नहीं करते.

अपराध

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अब तक हुए तीन चरणों के चुनावों में कुल साढ़े तीन सौ से ज़्यादा उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज़ हैं.

इलेक्शन वाच नामक एक स्वयंसेवी संस्था के मुताबिक ऐसे लोगों को सबसे अधिक टिकट बहुजन समाज पार्टी ने दिए हैं.

इलेक्शन वाच के ईश्वर चंद्र द्विवेदी कहते हैं,"राजनीतिक दलों के लिए चुनाव में ग़ैरकानूनी और दूसरे ग़लत काम करने वाले बाहुबलियों को लगा कि वह यह काम अपने लिए क्यों न करें. एक राजनीतिक दल ने इनके सहारे अपना दबादबा बढ़ाया तो दूसरी पार्टियाँ भी यही करने लगीं."

लगभग ठप्प पड़ चुकी प्रशासनिक और क़ानूनी व्यवस्था के दौर में हालात और बदतर होते दिखते हैं.

जैसा कि दीवार-खिड़कियों पर रंग-रोगन करने वाले मोहम्मद हनीफ़ की बातों से लगता है," हम लोग तो इन्हीं बड़े लोगन के पास जाते हैं. का है कि इ हमारी मदद करते हैं. कहते हैं गरीबन को मत सताओ वरन् हमरी कहां सुनवाई है."

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