BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 26 मार्च, 2007 को 17:40 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
विदेशी चरमपंथियों को पनाह नहीं मिलेगी
विदेशी सैनिक
अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर बड़ी संख्या में विदेशी चरमपंथी मौजूद हैं
पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे इलाक़े के क़बायली सरदारों ने वादा किया है कि वे विदेशी चरमपंथियों को पनाह नहीं देंगे.

पाकिस्तान सरकार और बाजौड़ एजेंसी क़बायली सरदारों के बीच हुए समझौते के बाद यह वादा किया गया है.

पाकिस्तान सरकार चाहती है कि क़बायली सरदार अल क़ायदा और तालेबान से जुड़े विदेशी चरमपंथियों को पनाह देना बंद कर दें.

पिछले ही वर्ष पाकिस्तानी सेना ने विदेशी चरमपंथियों की तलाश में बाजौड़ एजेंसी में दो बड़े अभियान चलाए थे.

इस समझौते को काफ़ी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि बाजौड़ एजेंसी ऐसा इलाक़ा रहा है जहाँ विदेशी चरमपंथियों की मौजूदगी की बात पाकिस्तान और अमरीका के अधिकारी लगातार करते रहे हैं.

इसी वर्ष जनवरी में हुए अमरीकी सेना के हमले में 13 लोग मारे गए थे जबकि पिछले वर्ष अक्तूबर महीने में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में एक मदरसे में 80 लोगों की मौत हो गई थी.

बाजौड़ के मुख्य शहर खार में हुए इस समझौते पर हस्ताक्षर के वक़्त सलारज़ई और उस्मानखेल कबीले के 500 से अधिक बुज़ुर्ग मौजूद थे.

पाकिस्तान सरकार का कहना है कि बाजौड़ इलाक़े के सबसे बड़े कबीले मामोंद के साथ पहले ही ऐसा समझौता हो चुका है.

सोमवार को हुए समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों में से एक नेता मलिक अब्दुल अज़ीज़ ने बीबीसी को बताया कि इस समझौते का मतलब ये है कि पाकिस्तान सरकार को अब किसी तरह की सैनिक कार्रवाई करने से पहले क़बायली सरदारों को इसकी सूचना देनी होगी.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>