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विदेशी चरमपंथियों को पनाह नहीं मिलेगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे इलाक़े के क़बायली सरदारों ने वादा किया है कि वे विदेशी चरमपंथियों को पनाह नहीं देंगे. पाकिस्तान सरकार और बाजौड़ एजेंसी क़बायली सरदारों के बीच हुए समझौते के बाद यह वादा किया गया है. पाकिस्तान सरकार चाहती है कि क़बायली सरदार अल क़ायदा और तालेबान से जुड़े विदेशी चरमपंथियों को पनाह देना बंद कर दें. पिछले ही वर्ष पाकिस्तानी सेना ने विदेशी चरमपंथियों की तलाश में बाजौड़ एजेंसी में दो बड़े अभियान चलाए थे. इस समझौते को काफ़ी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि बाजौड़ एजेंसी ऐसा इलाक़ा रहा है जहाँ विदेशी चरमपंथियों की मौजूदगी की बात पाकिस्तान और अमरीका के अधिकारी लगातार करते रहे हैं. इसी वर्ष जनवरी में हुए अमरीकी सेना के हमले में 13 लोग मारे गए थे जबकि पिछले वर्ष अक्तूबर महीने में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में एक मदरसे में 80 लोगों की मौत हो गई थी. बाजौड़ के मुख्य शहर खार में हुए इस समझौते पर हस्ताक्षर के वक़्त सलारज़ई और उस्मानखेल कबीले के 500 से अधिक बुज़ुर्ग मौजूद थे. पाकिस्तान सरकार का कहना है कि बाजौड़ इलाक़े के सबसे बड़े कबीले मामोंद के साथ पहले ही ऐसा समझौता हो चुका है. सोमवार को हुए समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों में से एक नेता मलिक अब्दुल अज़ीज़ ने बीबीसी को बताया कि इस समझौते का मतलब ये है कि पाकिस्तान सरकार को अब किसी तरह की सैनिक कार्रवाई करने से पहले क़बायली सरदारों को इसकी सूचना देनी होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें हेलमंद में और सैनिक भेजेगा ब्रिटेन10 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना अमरीका ने रिज़र्व मरीन सैनिक बुलाए23 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना पाकिस्तान: मुशर्रफ़ सरकार की मुश्किलें09 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना अफ़ग़ानिस्तान में नाकाम रही रणनीति 09 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोलैंड नैटो को एक हज़ार सैनिक और देगा14 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना अफ़ग़ानिस्तान को 'अतिरिक्त सहायता'26 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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