|
भारत, चीन और रूस एकजुट हुए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत, रूस और चीन ने अपनी त्रिपक्षीय बातचीत को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराते हुए कहा है कि दुनिया में बहु ध्रुवीय व्यवस्था की ज़रूरत है और यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण के ज़रिए बनाई जानी चाहिए जिसमें संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशाली और पारदर्शी भूमिका सुनिश्चित हो. इन तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की यह त्रिपक्षीय बैठक बुधवार को दिल्ली में हुई जिसमें व्यापक मुद्दों के साथ यह भी चर्चा हुई कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलो में टकराव के रास्ते का विरोध किया जाए और इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी शामिल हो सकता है जिसके ज़रिए इशारा शायद अप्रत्यक्ष रूप से अमरीका की तरफ़ था. इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लैफ़रोफ़ और चीन के विदेश मंत्री ली झाओझिंग ने भाग लिया और ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, उत्तर कोरिया और मध्य पूर्व की स्थिति जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. बातचीत के बाद जारी एक संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है, "तीनों देशों के मंत्रियों ने मौजूदा विश्व स्थिति के राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक पहलुओं पर बातचीत की." संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है, "तीनों पक्षों ने अपनी ठोस राय ज़ाहिर की कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का लोकतंत्रीकरण करके एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनाई जा सकती है जो राष्ट्रों की समानता के सिद्धांत पर आधारित होगी. "चाहे कोई देश कितना ही बड़ा या छोटा क्यों ना हो, सभी की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए, अंतरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान हो और देशों के बीच आपसी सम्मान की भावना हो." विश्व संस्था समाचार एजेंसी पीटीआई की ख़बर के अनुसार भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बैठक के बाद रूसी और चीनी विदेश मंत्रियों के साथ संयुक्त रूप से पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "तीनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों को हल करने के लिए टकराव के बजाय सहयोग की भावना से काम लिया जाना चाहिए.
प्रणब मुखर्जी ने कहा, "हम संयुक्त राष्ट्र की अहमियत के बारे में भी एकमत हैं कि इसे और ज़्यादा प्रभावशाली बनाया जाना चाहिए ताकि यह सामरिक अंतरराष्ट्रीय वास्तविकताओं को ज़ाहिर कर सके." चीन के विदेश मंत्री ली झाओझिंग ने कहा, "हमें अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का लोकतंत्रीकरण करने के लिए मिलजुलकर प्रयास करने होंगे ताकि यह बहुसंस्कृतिवाद के सिद्धांतों पर और ज़्यादा खरी उतर सके." उन्होंने कहा कि तीनों देशों ने यह एकमत ज़ाहिर किया है कि संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को विश्व शांति सुनिश्चित करने और सभी के लिए समान विकास को बढ़ावा देने की दिशा में अहम अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए. ली ने कहा कि भारत, रूस और चीन अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों को शांति की दिशा में आगे बढ़ाने पर साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लैफ़रोफ़ ने भी ली झाओझिंग के विचारों से सहमति ज़ाहिर की. ली ने कहा कि तीनों देशों के बीच सहयोग से न सिर्फ़ क्षेत्र में बल्कि विश्व मामलों में भी फ़ायदा हो सकता है और यह सहयोग काफ़ी आगे बढ़ा है क्योंकि तीनों देशों ने यह सहयोग ऊर्जा, अर्थव्यवस्था, व्यापार, जैव तकनीक और सूचना तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ाने का फ़ैसला किया है. तीनों देशों के व्यापार फ़ोरम साल 2007 के अंत में मिलेंगे और तय करेंगे कि इन क्षेत्रों में सहयोग और ज़्यादा मज़बूत करने के लिए क्या ठोस कार्य योजना तैयार की जा सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें परमाणु संयंत्रों की स्थापना पर सहमति25 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस भारत-रूस संयुक्त बयान की ख़ास बातें25 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस भारत-रूस के बीच अहम समझौते24 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस भारत और चीन आर्थिक सहयोग बढ़ाएँगे21 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़्रीका की सहायता राशि बढ़ाएगा चीन04 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना चीन के धनी लोगों की संपत्ति में वृद्धि03 नवंबर, 2006 | कारोबार चीन में घूसखोरों की शामत24 अक्तूबर, 2006 | कारोबार इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||