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मुशर्रफ़ ने सीमा पर ढिलाई मानी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने स्वीकार किया है कि सीमा पर तैनात कुछ सुरक्षाबल तालेबान लड़ाकों को अफ़गानिस्तान सीमा में घुसने दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी कुछ घटनाओं की ख़बरें मिली हैं कि सुरक्षाबलों ने तालेबान लड़ाकों की तरफ से नज़रें फेर ली. हालाँकि परवेज़ मुशर्रफ़ ने इस बात से फिर इनकार किया कि उनके देश की सेना और गुप्तचर सेवाएँ तालेबान की मदद कर रही हैं और उनकी सरकार तालेबान को अफ़ग़ानिस्तान की तरफ़ जाने से रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही है. अफ़गान सरकार और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो की सेना को सीमा पर ज़बरदस्त संघर्ष करना पड़ रहा है और उन्होंने पाकिस्तान से "सीमा-पार आतंकवादी गतिविधियों" को कम करने के लिए सख़्त क़दम उठाने को कहा है. पाकिस्तान के उत्तरी और दक्षिणी वज़ीरिस्तान के क़बायली चरमपंथियों से समझौते के लिए भी परवेज़ मुशर्रफ़ की आलोचना हुई थी. आलोचकों का कहना था कि इस समझौते से तालेबान लड़ाकों को मनचाही जगह जाने की आज़ादी मिल जाएगी. मुश्किलें राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार को संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जिनमें सीमा पर स्थित कुछ चौकियों पर तैनात सुरक्षा बलों ने नज़र फेर ली. इसलिए मैं मान सकता हूँ कि कुछ और सुरक्षाबल भी ऐसा कर सकते हैं." परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि तालेबान के फिर से संगठित होने के मुद्दे पर पाकिस्तान को बलि का बकरा बनाया जा है. उन्होंने कहा है सीमा पर निगरानी के लिए अफ़ग़ान सरकार, अमरीका और नैटो के नेतृत्व वाली सेनाओं की संयुक्त रूप से ज़िम्मेदार हैं. परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, "इस तरह का भ्रम फैलाया जा रहा है कि तालेबान का फिर से उदय पाकिस्तान से हो रहा है. यह बिल्कुल ग़लत है. तालेबान फिर अपना संगठन फिर से अफ़ग़ानिस्तान में ही खड़ा कर रहे हैं, हाँ, कुछ समर्थन उन्हें पाकिस्तानी क्षेत्र से भी मिलता है." उन्होंने कहा कि अफ़गानिस्तान की सीमा पर मुश्किल इलाकों की चौकियों पर दो सुरक्षाकर्मियों के लिए अत्याधुनिक हथियारों से लैस और प्रशिक्षण प्राप्त कबायली आतंकवादियों को रोकना मुश्किल होगा. बीबीसी के संवाददाता हारुन रशीद ने हाल ही में दक्षिण वज़ीरिस्तान में तालेबान के सहयोगी क़बायली चरमपंथियों से मुलाक़ात की थी और उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया था कि वे विदेशी सेनाओं से मुक़ाबला करने के लिए सीमा पार अफ़गानिस्तान गए थे. भारत भारत के साथ संबंधों के बारे में परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि तीन साल पहले आपसी भरोसा बढ़ाने वाली जो प्रक्रिया शुरू हुई थी वो सही रफ़्तार से चल रही है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों की सरकारें कश्मीर मुद्दे सहित तमाम विवादों को हल करने की दिशा में ठोस प्रगति करेंगी. परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, "दोनों देशों के इतिहास में इतने अच्छे संबंध कभी नहीं रहे जितने कि इस समय हैं और हमें इस प्रगति पर ख़ुश होना चाहिए." | इससे जुड़ी ख़बरें भारत और पाक कश्मीर वार्ता पर सहमत14 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस भारतीय राजनयिकों पर नए प्रतिबंध01 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'कथनी-करनी में भेद ख़त्म करना होगा'31 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'समझौते के कारण तालेबान के हौसले बढ़े'11 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'कश्मीर पाकिस्तान का अभिन्न अंग नहीं'11 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'गैस पाइपलाइन पर तेज़ी से अमल हो'03 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान-चीनः कितने दूर कितने पास26 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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