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शुक्रवार, 02 फ़रवरी, 2007 को 13:10 GMT तक के समाचार
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लोकतंत्र है भारत की सबसे बड़ी पहचान
संसद
सबसे बड़ा लोकतंत्र होना है भारत की सबसे अहम पहचान
भारत की पहचान दुनिया भर में अनेक कारणों से है, एक लंबी सूची है लेकिन एक ताज़ा सर्वेक्षण से पता चलता है कि ज़्यादातर लोग भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के तौर पर देखते हैं.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने अलग-अलग कोणों से भारत की पूरी तस्वीर पेश करने के लिए भारत सप्ताह का आयोजन किया है, इसके तहत 3 फ़रवरी से 11 फ़रवरी तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे.

बीबीसी हिंदी ने इसी मौक़े पर यह जानने की कोशिश की है कि भारत की पहचान क्या है, उसकी समस्याएँ क्या हैं, मुद्दे क्या हैं.

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के पाठकों के बीच कराए गए इलेक्ट्रॉनिक सर्वेक्षण में दुनिया भर में बसे लगभग तीन हज़ार भारतीय लोगों ने हिस्सा लिया और उनमें से लगभग 35 प्रतिशत लोगों का मानना है कि भारत की सबसे बड़ी पहचान विशालतम लोकतंत्र के रूप में है.

इसके बाद बारी थी सांस्कृतिक विविधता की, 22 प्रतिशत लोगों ने माना कि भारत की अनेकता में एकता वाली छवि उसकी सबसे बड़ी पहचान है. लेकिन 16 प्रतिशत लोगों की राय में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था भारत की पहचान है.

सांस्कृतिक विविधता है भारत की एक बड़ी पहचान

सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 14 प्रतिशत लोगों ने माना कि धर्म और अध्यात्म के केंद्र के रूप में भारत को देखा जाता है. इसके बाद योग और ज्योतिष (5 प्रतिशत), जाति प्रथा (1.75 प्रतिशत), बॉलीवुड (3 प्रतिशत) रहे.

भारत में तेज़ी से बढ़ रहे उपभोक्तावाद के बारे में सर्वेक्षण में भाग लेने वाले लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, 64 प्रतिशत लोगों की राय थी कि भारत में बढ़ रहा बाज़ार का प्रभाव एक आधुनिक और गतिशील भारत का निर्माण कर रहा है लेकिन 36 प्रतिशत लोगों ने माना कि उपभोक्तावाद भारत की संस्कृति के प्रतिकूल है.

सर्वेक्षण में भाग लेने वाले लोगों की राय लगभग बराबर-बराबर बँटी देखी गई जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत का विकास सही दिशा में हो रहा है या फिर सिर्फ़ पश्चिमी देशों की नक़ल हो रही है, 51 प्रतिशत लोगों ने माना कि पश्चिम की नक़ल हो रही है जबकि 49 प्रतिशत लोगों की राय में विकास की दिशा सही है.

क्या भारत में आर्थिक समृद्धि का लाभ ग़रीब और ग्रामीण जनता तक भी पहुँच रहा है, इस सवाल के जवाब में ज़्यादातर लोग इस बात के हामी दिखे कि ग़रीब और ग्रामीण जनता समृद्धि की नई लहर से वंचित ही है. 88 प्रतिशत लोगों ने माना कि समृद्धि का लाभ ग़रीब और ग्रामीण जनता तक नहीं पहुँच रहा, सिर्फ़ 12 प्रतिशत लोग मानते हैं कि समृद्धि का लाभ सबको हो रहा है.

क्या है भारत की सबसे बड़ी समस्या?
भ्रष्टाचार- 41 प्रतिशत
विशाल जनसंख्या-12 प्रतिशत
ख़राब प्रशासन-16 प्रतिशत
जातिवाद-क्षेत्रवाद- 5 प्रतिशत
शिक्षा का अभाव-23 प्रतिशत

सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले ज़्यादातर लोग इस आरोप सही ठहराते हैं कि भारतीय मीडिया सनसनीख़ेज़ कवरेज को अधिक अहमियत देता है, लोगों से पूछा गया था कि क्या भारतीय मीडिया समाज के हर वर्ग की सही और पूरी तस्वीर पेश करता है? जवाब में लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भारतीय मीडिया सिर्फ़ सनसनीखेज़ रिपोर्टें पेश करता है चाहे वे ग्रामीण इलाक़ों में हों या शहरों में.

वह कौन सी समस्या है जो भारत की पूर्ण प्रगति की राह में सबसे बड़ी बाधा है, इस सवाल के जवाब में 41 प्रतिशत लोगों ने कहा सबसे बड़ी बाधा है भ्रष्टाचार जबकि 23 प्रतिशत लोगों का मानना है कि भारत की असली समस्या अशिक्षा है. विशाल जनसंख्या (12 प्रतिशत), जातिवाद (5 प्रतिशत) और ख़राब प्रशासन (16 प्रतिशत) को लोगों ने विकास की राह में बाधा माना.

अलगाववाद

भारत में जारी अलगाववादी और क्षेत्रीय हिंसा के बारे में लोगों की राय काफ़ी दिलचस्प है, सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 49 प्रतिशत लोगों की राय में समस्या की असली वजह ख़राब प्रशासन है. उसके बाद विकास के अभाव को 22 प्रतिशत लोगों ने समस्या का कारण माना है.

अलगाववादी हिंसा को ज़्यादातर लोग ख़राब प्रशासन की उपज मानते हैं

पड़ोसी देशों के साथ भारत के व्यवहार के बारे में पूछे जाने पर 86 प्रतिशत लोगों का कहना है था कि भारत का व्यवहार बड़े भाई की तरह है लेकिन 13 प्रतिशत लोगों का मानना था कि भारत एक दबंग दादा की तरह पेश आता है.

बीबीसी हिंदी कॉम ने यह जानने की कोशिश भी कि लोग भारत को विकसित राष्ट्र कब मानेंगे, 36 प्रतिशत लोगों का मानना था कि अगर भारत में 100 प्रतिशत साक्षरता हो तो वह विकसित राष्ट्रों की क़तार में आ जाएगा, जबकि 47 प्रतिशत लोगों का मानना था कि पश्चिमी देशों जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध होने पर भारत विकसित राष्ट्र माना जाएगा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता को विकसित राष्ट्र का पैमाना सिर्फ़ 2 प्रतिशत लोगों ने माना.

भारत से बाहर बसे भारतीय लोगों के नज़रिए को समझने के लिए सर्वेक्षण में पूछा गया कि भारत में बसने के लिए लौटने के बारे में वे क्या सोचते हैं, इसके जवाब में 80 प्रतिशत से अधिक लोगों ने माना कि वे भारत लौटने के लिए उत्सुक हैं, सिर्फ़ 16 प्रतिशत भारतीय ऐसे हैं जो बसने के लिए भारत नहीं लौटना चाहते.

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