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भारतीय युवाओं में विदेश जाने की ललक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी के एक सर्वेक्षण के मुताबिक दुनिया में हर पाँच में से चार युवा चाहते हैं कि उन्हें किसी भी देश में रहने की छूट मिलनी चाहिए. दो तिहाई नौजवानों ने कहा कि वे बेहतर भविष्य के लिए किसी दूसरे देश में जाएँगे. इस तरह की सोच रखने वालों में भारत और नैरोबी के युवा सबसे आगे हैं. भारत की राजधानी दिल्ली के लगभग 80 फ़ीसदी युवा बेहतर करियर की तलाश में किसी दूसरे देश की राह पकड़ना चाहते हैं. दुनिया भर के दस मुख्य शहरों में किए गए सर्वेक्षण में हर सात में से एक युवा ऐसा निकला जो किसी दूसरे देश में जाने के लिए अपनी ज़िंदगी तक दाँव पर लगाने को तैयार है. इस सर्वेक्षण में दुनिया के दस शहरों के 15 से 17 साल की उम्र के तीन हज़ार युवा शामिल हुए. बीबीसी के 'जेनरेशन नेक्सट' कार्यक्रम के तहत हुए इस सर्वेक्षण में युवाओं से आव्रजन, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और युद्ध, धर्म, शिक्षा, दुनिया की आबादी और ईमानदारी जैसे विषयों पर सवाल पूछे गए. सीमा का बंधन आव्रजन के सवाल पर 79 फ़ीसदी युवाओं का कहना था कि लोगों को अपनी पसंद के मुताबिक दुनिया के किसी भी देश में रहने की आजादी मिलनी चाहिए. 64 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि वे बेहतर भविष्य के लिए किसी अन्य देश का रूख करेंगे.
इस तरह की सोच रखने वालों में दिल्ली और नैरोबी के युवा सबसे आगे रहे. यहाँ के 81 फ़ीसदी युवाओं ने विदेश जाने की इच्छा जताई. दूसरी ओर इराक़ की राजधानी बग़दाद में सबसे अधिक 50 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे किसी और देश में रहने की तमन्ना नहीं रखते. सर्वेक्षण से कुल मिला कर यही परिणाम निकला कि आज के युवा किसी एक जगह स्थिर न रह कर घूमते रहना चाहते हैं और उनकी नज़र में विकसित और विकासशील देशों के बीच कोई ख़ास अंतर नहीं है. सहभागिता युवा इस बात पर बँटे नज़र आए कि विदेशों में जाने पर किसी व्यक्ति को वहाँ के मुताबिक ढलना चाहिए या अपनी संस्कृति को ही अपनाना चाहिए. 38 फ़ीसदी ने जहाँ अपनी संस्कृति को ही अपनाने की बात कही, वहीं 49 फ़ीसदी ने कहा कि जिस देश में जाना हो वहीं की संस्कृति को अपनाना चाहिए. दुनिया में अभी सबसे अहम मुद्दे कौन कौन से हैं, यह पूछने पर 36 फ़ीसदी ने आतंकवाद को मुख्य मुद्दा बताया. नई दिल्ली में सबसे अधिक 66 फ़ीसदी, न्यूयॉर्क में 63 फ़ीसदी और बग़दाद में 59 प्रतिशत ने आतंकवाद पर सबसे अधिक चिंता जताई. 71 फ़ीसदी युवाओं ने भारी बहुमत से माना कि अमरीका का आतंकवाद के ख़िलाफ़ कथित युद्ध दुनिया को सुरक्षित नहीं बना रहा है. ऐसा सोचने वालों में बग़दाद के युवाओं की संख्या 98 फ़ीसदी रही. | इससे जुड़ी ख़बरें 'युवाओं की नज़र में ऑनर किलिंग सही'04 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान में बदलाव चाहती है युवा पीढ़ी18 जून, 2005 | भारत और पड़ोस दिल्ली की रातों की युवा धड़कन24 मई, 2005 | भारत और पड़ोस 'अब युवाओं को मौक़ा देना चाहिए'15 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस वैलेंटाइन्स डे : नया ज़माना, नए तरीक़े13 फ़रवरी, 2004 | कारोबार युवा वर्ग के सामने सबसे बड़ी समस्या क्या है?08 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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