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'युवाओं की नज़र में ऑनर किलिंग सही' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी के एशियन नेटवर्क रेडियो के एक सर्वेक्षण के मुताबिक दस में से एक ब्रितानी एशियाई युवा 'आन के नाम पर की जाने वाली हत्या' को उचित ठहराते हैं. ब्रितानी एशियाई समुदाय में कराए गए इस सर्वेक्षण में भाग लेने वाले पाँच सौ लोगों में हिंदू, सिख, ईसाई और मुसलमान सभी थे. इनमें से 10 फ़ीसदी लोगों की राय में परिवार की इज़्ज़त को धूल-धूसरित करने वालों की हत्या में कुछ भी बुरा नहीं है. सर्वेक्षण में 16 से 34 साल उम्र के युवाओं को शामिल किया गया था. एशियन नेटवर्क से बात करने वाले ऐसे ही एक युवा ने कहा, "ईमानदारी से कहूँ तो मेरे साथ ये सब होता है तो शायद मैं भी ऐसा कुछ ही करूँ. बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार को ही अपनी जमापूँजी मानते हैं. इसलिए किसी ने उनके परिवार को नुक़सान पहुँचाया, तो क़ानून शायद कुछ नहीं कर पाए. मेरे साथ ऐसा कुछ हुआ तो, शायद मुझे ख़ुद मामले से निपटना पड़े." 'ऑनर किलिंग' ब्रिटेन में इस समय पुलिस क़रीब 200 ऐसे मामलों की जाँच कर रही है जिनके बारे में आशंका है कि वह सम्मान के नाम पर की गई हत्या का मामला हो सकता है. ऐसे मामले आम तौर पर एशियाई और मध्यपूर्व से आने वाले परिवारों में ज़्यादा देखने में मिलते हैं. आँकड़ों की माने तो यहाँ हर साल 13 लोग ‘ऑनर किलिंग’ का शिकार होते हैं. हालाँकि पुलिस और गैर सरकारी संस्थाओं के अनुसार असल में यह संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है. इसका अलावा ‘परिवार की जगहँसाई’ कराने के मामले में मार-पिटाई, अपहरण और बलात्कार जैसे मामले भी सामने आते रहते हैं. ऑनर किलिंग के मुद्दे पर फ़िल्म बना चुके पत्रकार नवीद अख़्तर इसे एक जटिल मसला मानते हैं. वे कहते हैं," एक युवा ब्रितानी एशियाई कैसा हो, ये जानना बड़ा मुश्किल है. दरअसल, पंजाब या कश्मीर से जिन मूल्यों के साथ हमारे माता-पिता आए थे, वो बातें बर्मिंघम या लंदन में रहते हुए काम नहीं आती. वास्तव में ब्रिटेन के ज़्यादातर एशियाई बेहद कबायली किस्म के समुदाय से आए हैं. सम्मान उनके लिए बहुत बड़ी चीज़ है- यह जायदाद से जुड़ा है, यह महिलाओं से जुड़ा है. और जब कोई आपकी प्रतिष्ठा को आघात पहुँचाने की कोशिश करता है, तो आपको प्रतिकार करना होता है." ब्रितानी एशियाई युवाओं में ऑनर किलिंग को लेकर सहमति भले ही सीमित स्तर पर हो, लेकिन इसने धार्मिक नेताओं को चौंकाया है. इस साल एक बहुधार्मिक सम्मेलन में इस समस्या से निज़ात पाने के उपायों पर विचार किया जाएगा. |
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