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मंगलवार, 18 जुलाई, 2006 को 16:00 GMT तक के समाचार
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ब्रितानी हिंदुओं को अन्य वर्गों का समर्थन

हिंदू मंदिर में टोनी ब्लेयर
पाया गया कि ब्रिटेन के अधिकतर हिंदू अपने समुदाय के प्रति सरकार के रवैये से असंतुष्ट हैं
ब्रिटेन के हिंदुओं के बारे में पिछले दिनों हुए एक सर्वेक्षण के नतीजों से लंदन में रहनेवाले एशियाई समुदाय के विभिन्न लोग भी सहमत नज़र आते हैं.

सर्वेक्षण में एशियाई शब्द को लेकर हिंदुओं ने आपत्ति उठाई थी और देखा ये जा रहा है कि मुस्लिम और सिख समुदाय के लोग भी मानते हैं कि इस बारे में कुछ किया जाना चाहिए.

सर्वेक्षण में पाया गया था कि अधिकतर हिंदू अपने-आपको एशियाई कहे जाने से संतुष्ट नहीं हैं और वे चाहते हैं कि उनको हिंदू कहकर संबोधित किया जाए.

सर्वेक्षण में ये भी सामने आया कि ब्रिटेन में रहनेवाले हिंदू अपने समुदाय के प्रति सरकार
के रवैये से हताश हैं.

ये भी कहा गया है कि ब्रिटेन के हिंदू ख़ुद को और समुदायों के मुकाबले उपेक्षित महसूस करते हैं.

ज़रूरत

 एशियाई शब्द अब अपना असल अर्थ खो चुका है इसलिए लोगों को उनके धर्म या राष्ट्रीयता से ही पुकारा जाना चाहिए
वहीद रहमान, लंदन के एक निवासी

लंदन का साऊथॉल इलाक़ा एक ऐसा इलाक़ा है जिसे मिनी पंजाब या मिनी इंडिया भी कहा जाता है.

साऊथाल में रहनेवाले वहीद रहमान कहते हैं,"एशियाई शब्द अब अपना असल अर्थ खो चुका है इसलिए लोगों को उनके धर्म या राष्ट्रीयता से ही पुकारा जाना चाहिए."

साउथॉल के गुरूद्वारा के अध्यक्ष हिम्मत सिंह सोही कहते हैं,"हिंदुओं की यह माँग एकदम जायज़ है कि उनको किसी ऐसे शब्द से जाना जाए जिससे कि उनकी पहचान अलग हो".

लंदन में ही एक इन्वेस्टरमेंट बैंकर शांतनु भागवत कहते हैं,"सबसे पहले तो 'एशियाई' शब्द का अर्थ ही साफ नहीं है. हालाँकि जापान और चीन भी एशिया महादीप में हैं लेकिन उनके निवासियों को जापानी और चीनी बुलाया जाता है."

 हिंदुओं की यह माँग एकदम जायज़ है कि उनको किसी ऐसे शब्द से जाना जाए जिससे कि उनकी पहचान अलग हो
हिम्म्त सिंह सोढी, प्रबंधक, साउथॉल गुरूद्वारा

साउथॉल के ही एक और निवासी बिपिन का मानना है,"इस देश में हिंदुओं की कोई अलग पहचान ही नही है इस लिए उनकी आवाज़ में दम नहीं रहता और सरकार उनकी किसी माँगों की तरफ़ ध्यान नहीं देती."

लंदन के एक और इलाक़े रेडब्रिज की गुजमेज़ वार्ड से लेबर पार्टी की काउंसिलर विनया शर्मा भी इस बात को मानती हैं कि सरकार हिँदुओं की आवाज़ को इस लिए नज़र अंदाज़ कर देती है क्योंकि हिँदू अपनी माँगों को लेकर शोर नहीं मचाते.

विनया शर्मा कहती हैं,"जब ब्रिटेन के हिंदू सरकार और देश के प्रति अपना फ़र्ज़ पूरा करते हैं तो सरकार को भी देखना चाहिए कि वो उनके हितों का ध्यान रखे".

लंदन में रहनेवाले कई हिंदू इसतरह की राय रखते हैं कि उनकी पहचान के विषय को गंभीरता से लिया जाना चाहिए ताकि विभिन्न समुदायों के बीच उनकी पहचान साफ़ हो सके."

हालाँकि कुछ प्रेक्षकों की राय है कि केवल नया नाम भर रख देने से ही समस्या नहीं सुलझ सकती क्योंकि नाम बदल देने के बावजूद व्यक्ति-व्यक्ति में ये फ़र्क करना मुश्किल होगा कि हिंदू कौन है और मुसलमान कौन, या भारतीय कौन है और पाकिस्तानी कौन.

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