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रोज़गार की गारंटी, भुगतान की नहीं!

हड़ताल करते सरगुजा के मज़दूर
बतौली गाँव के मज़दूर कहते हैं कि आगे वे इस योजना के तहत काम करने से पहले सोचेंगे
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक - रोज़गार गारंटी योजना के लागू होने के एक साल पूरे होने पर जहाँ कुछ जगह लोग संतुष्ट हैं वहीं कुछ अन्य जगह पर लोग सड़कों पर उतर आए हैं.

इस योजना को पिछले साल दो फ़रवरी को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने हरी झंडी दिखाई थी.

छत्तीसगढ के सरगुजा ज़िले में बतौली गाँव के 68 लोग इस योजना के तहत मज़दूरी करने के बाद, संतुष्ट होने की जगह गुस्से में हैं.

उन्होंने इस योजना के तहत 25 दिनों तक जो काम किया था. लेकिन उसकी मज़दूरी उन्हें नौ महीने बाद भी नहीं मिली है.

हो सकता है कि यह कोई अपवाद का उदाहरण हो क्योंकि कुछ दूसरी जगहों पर इस योजना में तारीफ़ योग्य काम की ख़बरें भी मिली हैं.

भारत सरकार के आंकडों के अनुसार पिछले एक साल में रोज़गार गारंटी कानून के तहत लगभग छह लाख काम देश भर में शुरू किए जा चुके हैं जिसमें देश की लगभग एक प्रतिशत जनता को काम मिला है.

मज़दूरी नहीं मिली

 अब इस अनुभव के बाद अगली बार रोज़गार गारंटी के तहत कौन काम माँगेगा? ये लोग सोचते होंगे कि मैंने इनको बेवकूफ़ बनाया. हम अधिकारियों से मिल चुके हैं पर कुछ नहीं हुआ और अब हारकर धरने पर बैठे हैं
चंद्रिका प्रसाद गुप्ता

सरगुज़ा ज़िले के चंद्रिका प्रसाद गुप्ता और गाँव के कई लोग धरने पर बैठे हैं. वे कहते हैं कि उनके गाँव के लोग तो इस रोज़गार गारंटी योजना में काम करने के कारण फँस ही गए हैं.

वह कहते हैं, "पिछली फ़रवरी जब मैंने रोज़गार गारंटी क़ानून के बारे में सुना तो मुझे लगा कि यह एक क्रांतिकारी क़ानून है और इसकी सफलता के लिये मुझे योगदान देना चाहिए."

बतौली गाँव में परचून की दुकान चलाने वाले चंद्रिका प्रसाद गुप्ता को इस नए क़ानून की पेचीदगियाँ समझने में दो महीने का समय लग गया.

फिर अप्रैल में उन्होंने उनके गाँव के 69 लोगों की ओर से काम की अर्ज़ी दी. आवेदन के एक हफ्ते बाद काम भी शुरू हो गया. सड़क बनाने के काम में बतौली के 68 लोगों ने 25 दिन काम किया.

पर आज नौ महीने बाद भी उनको मज़दूरी का पैसा नहीं मिला है.

 ऊपर से पैसा न आने के कारण ऐसा हुआ है. हम जल्दी ही इस समस्या को निपटा लेंगे
पीसी प्रसाद, योजना अधिकारी

चन्द्रिका प्रसाद गुप्ता पूछते हैं,"अब इस अनुभव के बाद अगली बार रोज़गार गारंटी के तहत कौन काम मांगेगा? ये लोग सोचते होंगे कि मैंने इनको बेवकूफ बनाया. हम सारे अधिकारियों से मिल चुके हैं पर कुछ नहीं हुआ और अब हारकर धरने पर बैठे हैं."

हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है.

सरगुजा में रोज़गार गारंटी के प्रमुख अधिकारी पीसी प्रसाद कहते हैं,"ऊपर से पैसा न आने के कारण ऐसा हुआ है. हम जल्दी ही इस समस्या को निपटा लेंगे."

अच्छा काम भी

लेकिन कुछ जगह उदाहरण प्रस्तुत करने वाला काम भी हुआ है और आंध्रप्रदेश में कुछ जगह हुआ काम उनमें से एक है.

कंप्यूटर से निगरानी
कंप्यूटर के इस्तेमाल से भ्रष्टाचार की आशंका कम हुई है: आंध्रप्रदेश के एक अधिकारी

आंध्रप्रदेश ने टीसीएस कंपनी की मदद से एक सॉफ्ट्वेयर विकसित किया है जिसके इस्तेमाल से इस क़ानून के तहत आने वाले काम की अर्ज़ी से लेकर भुगतान तक का सारा काम होता है.

आंध्रप्रदेश में रोज़गार गारंटी कानून के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुरली कहते हैं, "इस सॉफ्ट्वेयर के कारण पूरी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की गुंजाइश लगभग समाप्त हो गई है."

आंध्रप्रदेश के रंगारेड्डी ज़िले के बसई रेड्डी पल्ली गांव के पूर्व सरपंच डी भीमैया कहते हैं, "इस क़ानून के आने के बाद लोगों को काम मिला है और इस इलाक़े में आम खेती मज़दूरी की दर भी अब पिछले साल की तुलना में लगभग दुगुनी हो गई है."

काम की गुणवत्ता

हालांकि अभी इस योजना के देश भर में लागू होने के बारे में पूरी रिपोर्ट आनी बाक़ी है.

सरकार की ओर से अलग-अलग इलाक़ों में इस परियोजना की निगरानी का काम, जिसे 'सोशल-ऑडिट' भी कहा जा रहा है, अलग-अलग स्वयंसेवी संगठनों को दिया गया है.

मज़दूर
काम की प्राथमिकताएँ भी तय कर दी गई हैं

सेंटर फॉर साइंस एंड एंवायरनमेंट, दिल्ली के रिचर्ड महापात्र जो पिछले एक साल से रोज़गार गारंटी कानून के कार्यांवयन पर नज़र रखी है. वे कहते हैं, "पहले काम काफ़ी ढीला था पर पिछले पाँच महीने से योजना ने गति पकड़ी है."

रिचर्ड कहते हैं, "इस क़ानून की परख सिर्फ़ इस आंकड़े से नहीं होनी चाहिए कि इसके तहत कितने काम शुरू हुए और कितने लोगों को काम मिला. ये देखने की ज़रूरत है कि इस क़ानून के तहत शुरू हुए काम ने गांवों में कितने स्थाई संसाधन तैयार किए जो भविष्य में भी लोगों को रोज़गार दे सकें."

रोज़गार गारंटी कानून में गांवों में स्थाई संसाधन तैयार करने के लिये पानी रोकने, तालाब बनाने, पेड़ लगाने जैसे कामों को विशेष अहमियत दी गई है.

भारत सरकार के आंकडों के अनुसार सारे देश में इस कानून के अंतर्गत अब तक हुए काम में लगभग 65 प्रतिशत काम पानी से जुड़े हैं.

राज्यों से मिल रहे आंकडों पर नज़र दौडाएँ तो 10 राज्यों में 90 प्रतिशत से अधिक काम भविष्य में भी रोज़गार देने वाले संसाधन तैयार करने में हुए हैं तो दूसरी ओर छत्तीसगढ़ जैसे प्रदेश भी हैं जहाँ 70 प्रतिशत काम सड़क बनाने का रहा है.

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