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निठारी कांड:पुलिस जाँच पर उठे सवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नोएडा से कुछ और मानव अवशेष मिलने के बाद से सीबीआई ने भी यह मान लिया है कि इस पूरे मामले मे उतरप्रदेश पुलिस की जाँच अपने आप में गहन जाँच का विषय है. माना जा रहा है कि 29 दिसंबर को इस हत्याकाँड का राज़ खुलने के बाद लगभग 15 दिन तक जाँच करने वाली पुलिस ने असल मे सबूतों को नुकसान पहुँचाने या फिर नष्ट करने का ही काम किया. ग़ौरतलब है कि सीबीआई को निठारी में सोमवार तक की जाँच में मानव अवशेषों से भरे 40 पैकेट मिले थे. ये अवशेष राज्य पुलिस की जाँच के दौरान बरामद किए गए अवशेषों के अलावा हैं. पुलिस की भूमिका और जाँच को लेकर मीडिया और आमलोगों का दबाव लगातार बढ रहा था. इसके बावजूद ऐसा हुआ है. कुल मिलाकर अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में राज्य पुलिस के उच्च अधिकारियों ने इस नृशंस हत्याकाँड की गुत्थी को सुलझाने की बजाए ऐसी परिस्थितियाँ पैदा कीं जिन से जाँच की गति और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं. भूमिका पर सवाल नोएडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरके सिंह राठौर ने अपने बचाव मे जो तर्क दिया है वो कम हास्यस्पद नहीं है. उनका कहना है, "क़ानून व्यवस्था बनाए रखने में उनकी इतनी उर्जा लग गई कि वो जाँच का काम ठीक से नहीं करवा पाए." जबकी सच्चाई यह है कि इस दौरान कानून व्यवस्था पुलिस के लिए कभी चुनौती नहीं बनी. इस मामले की जाँच सीबीआई के हाथ में जाने के बाद जो सबूत मिले हैं उनसे लग रहा है कि इस नृशंस हत्याकांड मे मारे जाने वालों की संख्या शायद उससे कहीं ज़्यादा है जितनी उतरप्रदेश पुलिस मान कर चल रही थी. घटनास्थल के आसपास अभी भी ऐसे काफी लोग जमा हैं जिनके बच्चे लापता हुए थे, सीबीआई की जाँच शुरू होने के बाद भी उन्हें अपने सवालों के जवाब उन्हें नहीं मिले हैं. हालांकि अब नोएडा पुलिस उन्हें यहाँ से खदेड़ने की कोशिश नहीं कर रही है और उन्हें उम्मीद है कि सीबीआई उनके ख़ून के नमूने लेकर यह बता पाएगी की कहीं उनके बच्चे इस नृशंस हत्याकाँड के शिकार तो नहीं हो गए. निठारी गाँव में मीडिया अभी भी जमा है पर नेताओं का आना लगभग बंद हो गया है. अब शायद उतरप्रदेश के चुनावों में उन्हें निठारी फिर याद आए लेकिन फिलहाल वो लोग जो अपने बच्चों की तलाश मे यहाँ डटे हैं उन्हें दिलासा देने वाला यहाँ कोई नहीं है. कुल मिलाकर कदम-कदम पर निठारी का नृशंस हत्याकांड यह साबित कर रहा है की ग़रीब को व्यवस्था ने कैसे रामभरोसे छोड़ा हुआ है. पृष्ठभूमि उल्लेखनीय है कि दिल्ली से सटे नोएडा के निठारी गाँव में एक घर के पीछे नाले से 17 बच्चों के कंकाल मिलने से सनसनी फैल गई थी.
इसकी वजह यह है कि स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले दो वर्षों में कम से कम 40 बच्चे लापता हो चुके हैं. पुलिस ने भी बच्चों के लापता होने की बात मानी है. माना जा रहा है कि बरामद कंकाल इन लापता बच्चों के हो सकते हैं. इस दिशा में फोरेंसिक जाँच चल रही है. पुलिस का कहना है कि हत्या से पहले सभी का यौन शोषण किया गया था. नोएडा पुलिस मामले के मुख्य अभियुक्तों मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र सिंह को गिरफ़्तार कर लिया है. इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर अनदेखी का आरोप लगाया है. इस मामले के सामने आने के बाद से अबतक छह पुलिसकर्मियों और तीन पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा चुकी है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मानव अवशेषों से भरे 40 पैकेट मिले'15 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस निठारी में 'और मानव कंकाल मिले' 14 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस सीबीआई ने निठारी कांड की जाँच शुरू की12 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस निठारी का सच और हमारा सच11 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस सोनिया का निठारी दौरा, मुलायम को कोसा06 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मुलायम सीबीआई जाँच पर राज़ी 05 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस सीबीआई जाँच की अपील ठुकराई03 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट माँगी02 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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