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सीबीआई जाँच की अपील ठुकराई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के निठारी गाँव में 17 बच्चों के साथ कथित यौनाचार और उनकी हत्या के मामले की जाँच सीबीआई से कराने की अपील ख़ारिज कर दी है. इस बीच केंद्र सरकार ने पूरे मामले की जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है. केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रेणुका चौधरी ने बीबीसी के लिए मोहनलाल शर्मा को बताया कि इस पूरे मामले की जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया जा रहा है. उन्होंने कहा, "फिलहाल इस मामले की सीबीआई से जाँच कराने की ज़रूरत नहीं है. अगर जाँच कमेटी की रिपोर्ट आने के ऐसा महसूस होता है कि इसकी और जाँच कराने की ज़रूरत है तो हम सीबीआई से जाँच करवा सकते हैं." उन्होंने कहा कि सरकार इस घटना की जड़ों तक जाना चाहती है और यह पता लगाना चाहती है कि ऐसा हुआ क्यूँ. साथ ही पुलिस की भूमिका की भी जाँच की जाएगी कि इतते दिनों तक लोग शिकायत करते रहे और कोई कार्रवाई नहीं हुई. अपील ख़ारिज सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वाईके सभरवाल और न्यायमूर्ति सीके ठक्कर ने अधिवक्ता रवि प्रकाश गुप्ता की मौखिक अपील को ख़ारिज कर दिया. रवि प्रकाश गुप्ता ने अदालत में अपनी दलील में कहा था कि स्थानीय पुलिस दोषियों के साथ मिली हुई है और मामले की निष्पक्ष जाँच नहीं हो रही है. इस पर अदालत ने कहा कि अभी केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी को जाँच में शामिल करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग पहले से ही मामले की पड़ताल कर रहे हैं. रवि प्रकाश गुप्ता का कहना था कि जो कंकाल बरामद हुए हैं, उनमें शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से की हड्डियाँ मिली हैं और धड़ गायब है, इसलिए मानव अंगों की तस्करी का मामला भी हो सकता है. ग़ौरतलब है कि इस मामले में मोहिंदर सिंह पंढेर और उनके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ़्तार किया जा चुका है. जाँच समिति केंद्र सरकार ने पूरे मामले की जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है. इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय, महिला और बाल कल्याण विभाग और राज्य सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे. महिला और बाल विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव मंजुला कृष्णन को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. समिति ख़ास तौर पर इस बात की जाँच करेगी कि स्थानीय पुलिस ने लापता हुए बच्चों को ढूँढने के लिए क्या क़दम उठाए हैं. साथ ही इस बात की पड़ताल की जाएगी कि स्थानीय प्रशासन ने इस घटना के शिकार हुए परिवारों के साथ किस तरह सलूक किया है. समिति अपनी रिपोर्ट एक पखवाड़े के भीतर सौंप देगी. | इससे जुड़ी ख़बरें लोगों का ग़ुस्सा फूटा, पुलिस पर पथराव01 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट माँगी02 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस नोएडा में नाराज़ लोग सड़कों पर उतरे31 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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