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आर्सेलर-मित्तल को उड़ीसा में हरी झंडी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी आर्सेलर-मित्तल ने उड़ीसा में स्टील प्लांट लगाने के लिए सहमति पत्र पर दस्तख़त किया है. उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में आर्सेलर-मित्तल की ओर से मलय मुखर्जी और राज्य के खान सचिव एलएन गुप्ता ने सहमति पत्र यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए. योजना के तहत कंपनी उड़ीसा में एक करोड़ 20 लाख टन क्षमता का प्लांट बनाएगी. उल्लेखनीय है कि दक्षिण कोरियाई कंपनी पोस्को भी उड़ीसा में इतनी ही क्षमता का स्टील प्लांट स्थापित कर रही है. इस सिलसिले में लक्ष्मी निवास मित्तल ने इसी साल जुलाई में उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बात की थी. यूरोपीय इस्पात कंपनी आर्सेलर के अधिग्रहण के बाद मित्तल स्टील दुनिया की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी बन गई है और भारतीय मूल के लक्ष्मी मित्तल इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ हैं. योजना लक्ष्मी मित्तल ने उड़ीसा यात्रा के दौरान बताया था कि उनकी कंपनी दो चरणों में यह प्लांट स्थापित करेगी. यह भारत में आर्सेलर-मित्तल का सबसे बड़ा निवेश होगा. मित्तल ने कहा था कि मुख्यमंत्री पटनायक ने जो सुविधाएँ देने की पेशकश की है वो चीन से भी बेहतर है. ग़ौरतलब है कि मित्तल स्टील ने झारखंड में भी स्टील प्लांट लगाने के लिए वहाँ की सरकार के साथ आरंभिक समझौता किया था लेकिन इस योजना पर कोई प्रगति नहीं हो सकी है. झारखंड में विपक्षी पार्टियां चुनिंदा लौह अयस्क खदानों को मित्तल स्टील के नियंत्रण में देने का विरोध कर रही हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें मित्तल ख़रीद रहे हैं मैक्सिको की कंपनी20 दिसंबर, 2006 | कारोबार मित्तल बने 'मित्तल-आर्सेलर' के नए सीईओ06 नवंबर, 2006 | कारोबार मित्तल स्टील आरोपों के घेरे में03 अक्तूबर, 2006 | कारोबार उड़ीसा में स्टील प्लांट लगाएँगे मित्तल 07 जुलाई, 2006 | कारोबार मित्तल और आर्सेलर की साझेदारी25 जून, 2006 | कारोबार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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