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मित्तल स्टील आरोपों के घेरे में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी मित्तल स्टील पर आरोप लगाया गया है कि उसने लाइबेरिया में अपना 'आधिपत्य कायम' कर लिया है. ग्लोबल विटनेस नाम के संगठन ने कहा है कि मित्तल कंपनी ने लाइबेरिया में कच्चे लोहे के खनन को लेकर 90 करोड़ डॉलर का समझौता किया है. लेकिन इसमें कंपनी के पास मानवाधिकारों और पर्यावरण संबंधी क़ानून के दायरे से बाहर निकलने का विकल्प है. संगठन के मुताबिक कंपनी को पाँच साल तक कर भी नहीं देना होगा और जब कंपनी देना शुरु करेगी तो अपने तय किए दाम पर देगी. कंपनी की ओर से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. मित्तल कंपनी के साथ हुए समझौते की नई लाइबेरिया सरकार समीक्षा कर रही है. ग्लोबल विटनेस के अनुसार समझौते का मतलब है कि मित्तल कंपनी की लोकतांत्रिक सरकार के प्रति जबावदेह नहीं है और उसे बदले में सरकार को पर्याप्त प्रतिफल नहीं देना होगा. लाइबेरिया और मित्तल स्टील के बीच समझौता पिछले साल वहाँ की अंतरिम सरकार के साथ हुआ था. लाइबेरिया में पिछले 14 सालों से संघर्ष चल रहा था और अब वो इससे उबरने की कोशिश कर रहा है. लाइबेरियाई राष्ट्रपति ने कहा है कि वो अंतरिम सरकार के सभी समझौतों की समीक्षा करेंगी. मित्तल कंपनी अगले 25 सालों में अपना और विस्तार करना चाहता है और इसके लिए जो कच्चा माल चाहिए उसमें से आधा माल लाइबेरिया से कंपनी को मिलेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें उड़ीसा में स्टील प्लांट लगाएँगे मित्तल 07 जुलाई, 2006 | कारोबार क़ानूनी क़दम उठा सकती है रूसी कंपनी26 जून, 2006 | कारोबार मित्तल और आर्सेलर की साझेदारी25 जून, 2006 | कारोबार मित्तल स्टील के विरोध से भारत 'चिंतित'01 फ़रवरी, 2006 | कारोबार कठिन है डगर औद्योगिक विकास की05 नवंबर, 2005 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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