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...कितना खुला-खुला है यहाँ का जीवन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी की टीम के साथ भारत में रोड शो के लिए यूं तो ये मेरा तीसरा सफ़र है, लेकिन उत्साह और रोमांच पहली बार जैसा ही है. मेरी पैदाइश और परवरिश लंदन में हुई लेकिन मैं भारतीय मूल की हूँ. चार पीढ़ी पहले, मेरे पूर्वज भारत से गयाना चले गए थे. बीबीसी के रोड शो ‘आपकी दुनिया आपकी आवाज़’ का कारवाँ उत्तर प्रदेश की पर्यटन नगरी काशी यानी बनारस से गुजर रहा था और इसका पड़ाव था बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू). प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले बीबीसी हिंदी की टीम मास कम्यूनिकेशन के छात्रों से मिलने विश्वविद्यालय पहुँची. बीबीसी हिंदी की प्रमुख अचला शर्मा और उनकी टीम के सदस्यों ने उत्सुक छात्रों के सवालों के जवाब दिए. बीबीसी हिंदी के तमाम श्रोताओं का आम सवाल था कि हम किस तरह प्रोग्राम तैयार करते हैं, लिहाज़ा प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बाद मैने और टॉम ने बीबीसी हिंदी कार्यक्रम 'आपकी राय' को रिकॉर्ड करने की योजना बनाई. गोलमेज चर्चा हमने कुछ उपकरण लिए और गोलमेज चर्चा की योजना बनाई ताकि छात्रों को दिखाया जा सके कि हम किस तरह से प्रोग्राम रिकॉर्ड करते हैं. हमें ये देखकर हैरानी हुई कि करीब 30 छात्र गोलमेज चर्चा में शिरकत के लिए तैयार थे. हमने छात्रों को उपकरणों की कार्यप्रणाली से वाकिफ़ कराने का हरसंभव प्रयास किया.
हमें पता चला कि हॉलीवुड के स्टार ब्रेड पिट भी उसी होटल में हैं, जहाँ हमारी टीम ठहरी हुई है. बदकिस्मती से हमारे व्यस्त कार्यक्रम के चलते वह हमसे नहीं मिल सके. बहरहाल, बाद में हमने एक नाव ली और गंगा की सैर पर निकल पड़े. तभी आकाश ने पहली बार भारत आए टॉम से पूछा कि यूरोप और भारत में वह अहम फ़र्क क्या पाते हैं. वो इस चर्चा में मग्न थे और मैं सोच रही थी, “यहाँ जीवन कितना खुला-खुला है. लोग बेपरवाह घाटों पर नहा रहे हैं, कपड़े धो रहे हैं और उन्हें सुखा रहे हैं.” जमकर बजीं तालियाँ इसके बाद हमारा कारवाँ कालीन नगरी भदोही पहुँचा. बड़ी संख्या में स्थानीय लोग बीबीसी रेडियो के कार्यक्रमों और बीबीसी हिंदी डॉट काम के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए वहाँ जमा थे. अगले शहर ओबरा रवाना होने से पहले मैने गंगा की ‘कलकल’ रिकॉर्ड की और टॉम ने कुछ तस्वीरें उतारीं.
ओबरा में तो लोगों का उत्साह इस क़दर था और उन्होंने बीबीसी हिंदी टीम के लिए इतनी तालियाँ बजाई कि आसपास में रहने वाले लोग अपने घरों की खिड़कियों और दरवाजों से बाहर झाँकने लगे. इसके बाद रेनुकूट से पटना तक का सफ़र. पटना के लिए हमारी कार अभी एक घंटे का ही सफ़र तय कर सकी थी कि दूसरी ओर से आ रही तेज रफ़्तार कार हमारी कार से टकरा गई. शुक्र ये रहा कि हमें कुछ नुकसान नहीं पहुँचा. इसके बाद हमारा काफ़िला रॉबर्टसगंज होता हुआ मुग़लसराय पहुँचा, जहाँ हमने दुर्घटनाग्रस्त कार की जगह दूसरी कार ली और फिर सफ़र पर निकल पड़े. आज रोड शो के सफ़र की मेरी आख़िरी रात है. हमने बिहार के सासाराम में पहला शो किया और ये बहुत शानदार रहा. | इससे जुड़ी ख़बरें 'कालीन है तो रोज़गार है'16 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत के स्विट्ज़रलैंड' में नक्सलवाद हावी19 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बीबीसी हिंदी का रोड शो बिहार पहुँचा24 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बिजली पैदा करनेवाले क्षेत्र की ही बिजली गुल27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस क्या हैं बिहार के लोगों के सरोकार?27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस क्या हैं झारखंड के लोगों के सरोकार?27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बीबीसी हिन्दी रोड शो कार्यक्रम13 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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