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रविवार, 19 नवंबर, 2006 को 16:13 GMT तक के समाचार
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'भारत के स्विट्ज़रलैंड' में नक्सलवाद हावी

ओबरा
स्थानीय लोगों का मानना है कि स्थितियों को सुधारने के लिए प्रशासन को अपना रुख बदलना होगा
सोनभद्र भारत का स्विट्ज़रलैंड बनेगा- ये कहा था भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने.

इसमें कोई शक नहीं कि उत्तरप्रदेश का सोनभद्र है भी बहुत ख़ूबसूरत. छोटी-छोटी पहाड़ियाँ, झरने, हरियाली...लेकिन इसी क़ुदरती ख़ूबसूरती के बीच यहाँ के धरतीपुत्र बेहद ख़राब परिस्थितियों में रहते हैं.

जानकारों का कहना है कि यही कारण है कि इस इलाक़े में नक्सलवाद का ख़ासा प्रभाव है.

बीबीसी हिंदी के रोड शो में जब हम सोनभद्र के ओबरा शहर में थे तो हमने एक बहस छेड़ी कि इस इलाक़े में नक्सलवाद क्यों फैल रहा है. मंच पर थे सोनभद्र के पुलिस कप्तान यानि पुलिस अधीक्षक रघुबीर लाल.

उन्हीं के साथ थीं बारहवीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा बबीता. इतनी छोटी, इतनी मासूम कि उसे आप ज़ोर से बात भी करना नहीं चाहेंगे.

लेकिन उसने खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि अगर पूँजीपति और प्रशासनिक अधिकारी अपना रुख़ नहीं बदलेंगे तो नक्सलवाद और बढ़ेगा.

बातचीत का न्यौता

सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक ने दावा किया कि वो डंडे नहीं संवाद में विश्वास करते हैं जिससे स्थिति कुछ संभली है. लगे हाथों बीबीसी के मंच से ही उन्होंने नक्सलवादियों को बातचीत का न्यौता भी दे डाला.

रोडशो में कई लोगों ने अपने विचार रखे

जहाँ बीबीसी के कुछ श्रोताओं ने इस बात पर ख़ुशी जताई कि पुलिस अधीक्षक मूल निवासियों के साथ संवाद स्थापित करना चाहते हैं, वहीं लोगों का ये कहना था कि जहाँ इस तरह की रणनीति कुछ हद तक सफल हो सकती है, वहीं और बदलावों की ज़रूरत है.

जैसे उद्योगों में धरतीपुत्रों यानि मूल निवासियों को नौकरी ज़रूर मिलनी चाहिए, वन क़ानूनों को बदलना चाहिए ताकि आदिवासियों और जंगल का नाता न टूटे.

लंबे समय से नेपाल से लेकर झारखंड और आँध्र तक नक्सलवादी कॉरिडोर की बात कही जाती रही है.

लोगों का कहना था कि छोटे छोटे शहरों, गाँवों, कस्बों में धरतीपुत्रों की इन बातों का ध्यान न रखा गया तो 16 साल की बबीता की बात सच हो सकती है और नक्सलवाद और भयंकर रूप अख़्तियार कर सकता है.

और तब एक ही बात कही जा सकेगी – अब पछताए क्या होत है जब चिड़िया चुग गई खेत.

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