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नेपाल में नागरिकता विधेयक पारित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल की संसद ने विवादास्पद नागरिकता विधेयक पारित कर दिया है. नेपाली संसद के अध्यक्ष सुभाष नेमवांग का कहना है कि नए क़ानून से भारतीय सीमा से सटे इलाक़ों में नागरिकता की समस्या सुलझने की उम्मीद है. ग़ौरतलब है कि दक्षिणी नेपाल का बड़ा हिस्सा भारतीय सीमा से सटा हुआ है और इन सीमावर्ती इलाक़ों में रहने वाले भारतीय मूल के हज़ारों लोग नेपाल की नागरिकता से वंचित हैं. सुभाष नेमवांग का कहना है कि नया नागरिकता क़ानून रविवार से प्रभावी हो गया है और इस पर सभी राजनीतिक दलों ने सहमति जताई है. नेपाल वर्कर्स एंड पीजेंट्स पार्टी के सांसद नारायण मान बिजुक्षे ही अकेले सांसद थे जिन्होंने नए क़ानून पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, "इससे (नए क़ानून से) अभी भी ग़रीब और पिछड़े वर्गों के लोगों को अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ सकता है." एक अन्य सांसद लीला मणि पोखरैल ने बीबीसी से कहा कि संसद ने जल्दबाज़ी में यह फ़ैसला किया है. उनका कहना है कि यह मामला माओवादियों के साथ मिल कर गठित होने वाली अंतरिम सरकार के समक्ष फिर उठ सकता है. इसी अंतरिम सरकार की निगरानी में नेपाल में संवैधानिक सभा के चुनाव अगले साल जून में होने हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में ऐतिहासिक शांति समझौता21 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'राजा ज्ञानेंद्र ज़्यादतियों के लिए ज़िम्मेदार'20 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस माओवादी कर रहे हैं जबरन भर्ती18 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अमरीकी नज़र में माओवादी 'आतंकवादी'16 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल ने दो करोड़ डॉलर की मदद माँगी15 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस हथियार रखने के लिए जगह की तलाश12 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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