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पाकिस्तान में बलात्कार संबंधी नया क़ानून | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन ने बलात्कार और व्यभिचार संबंधी इस्लामी क़ानून में संशोधन के लिए एक विधेयक का समर्थन किया है. इस विधेयक को पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की मंज़ूरी मिलने के बाद बलात्कार संबंधी मुकदमों की सुनवाई दीवानी अदालतों में हो सकेगी. अभी तक पाकिस्तान में बलात्कार संबंधी मुकदमों की सुनवाई शरिया अदालतों में ही होती है और पीड़ित महिला को जुर्म साबित करने के लिए चार पुरुषों की गवाही पेश करनी पड़ती है. ऐसा न कर पाने की दशा में पीड़िता को व्यभिचार के मुक़दमें का सामना करना पड़ता है. नया क़ानून बन जाने के बाद में बलात्कार संबंधी मुकदमों में डीएनए और अन्य वैज्ञानिक सबूतों को पेश किए जाने की अनुमति होगी. इसके अलावा विवाहेत्तर संबंध रखने वालों को फांसी की सज़ा नही दी जाएगी. पाकिस्तानी सीनेट ने कुछ इस्लामी सांसदों की विधेयक पर आपत्तियों को भी ख़ारिज कर दिया. पिछले ह़फ्ते निचले सदन में जब इस विधेयक को मतदान के पेश किया गया था तो इन्ही सांसदों ने मतदान का बहिष्कार किया था. धर्म पर आधारित पार्टियों के विपक्षी गठबंधन के एक नेता ख़ुर्शीद अहमद ने इस विधेयक को पाकिस्तान में विदेशी संस्कृति और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देने वाला बताया है. पाकिस्तान के स्वतंत्र मानव अधिकार आयोग के मुत़ाबिक पाकिस्तान में हर दो घंटे में एक महिला के साथ बलात्कार और हर आठ घंटे में एक सामूहिक बलात्कार होता है. पत्रकारों के म़ुताबिक यह आँकड़े शा़यद सही तस्वीर सामने नहीं लाते क्योंकि कई बलात्कार घटनाएँ सामने नहीं आ पातीं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'पश्चिम में भी महिला कमज़ोर है'13 मई, 2006 | भारत और पड़ोस बलात्कार क़ानून में संशोधन को मंज़ूरी15 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बलात्कार संबंधित विधेयक टला13 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान में चार को फाँसी29 जून, 2006 | भारत और पड़ोस 'शोषण के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रहेगी'01 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'सिर्फ़ पाकिस्तान ही क्यों..?'07 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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