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बुधवार, 07 सितंबर, 2005 को 15:32 GMT तक के समाचार
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'सिर्फ़ पाकिस्तान ही क्यों..?'
परवेज़ मुशर्रफ़
मुशर्रफ़ ने कहा कि ऐसे मामलों को देश के बाहर नहीं ले जाना चाहिए
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि महिलाओं के साथ होने वाले ख़राब बर्ताव के मामले में उनके देश को अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए.

महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा पर एक सम्मेलन में परवेज़ मुशर्रफ़ ने ये विचार व्यक्त किए.

लेकिन पाकिस्तान के दो प्रमुख महिला संगठनों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया.

महिलाओं के लिए काम करने वाले एजीएचएस और मानवाधिकार आयोग ने इस सम्मेलन को एक 'बनावटी आयोजन' बताते हुए इसका बहिष्कार किया.

कराची में बीबीसी संवाददाता आमिर अहमद ख़ान का कहना है कि इन दोनों संगठनों ने हाल में हुए बलात्कार मामलों में सरकार की भूमिका पर अपनी अप्रसन्नता ज़ाहिर की है.

ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ ही दिनों के दौरान दो ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिनमें अलग-अलग दो महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बलात्कार किया. इनमें से एक मामले में तो प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ को जाँच के आदेश देने पड़े.

दूसरी तरफ़ राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने बलात्कार के मामलों को देश से बाहर तक पहुँचाने के लिए मानवाधिकार संगठनों की आलोचना की है.

समाचार एजेंसी के अनुसार राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, "आप पाकिस्तान के अंदर कोई कार्रवाई करें, तो मैं आपके साथ हूँ लेकिन ऐसे मामले देश के बाहर मत ले जाइए, मैं आपके साथ नहीं हूँ."

सम्मेलन और आलोचना

पाकिस्तान में महिलाओं के साथ होने वाले ख़राब बर्ताव पर होने वाले दो दिवसीय सम्मेलन में दुनिया भर से आए प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. सम्मेलन में उन लोगों को साथ लाने पर भी ज़ोर दिया जाएगा जो महिलाओं के अधिकारों को लिए काम करते हैं.

मुख़्तार माई
मुख़्तार माई के मामले ने काफ़ी तूल पकड़ा

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, "पाकिस्तान की छवि धूमिल नहीं की जानी चाहिए और उसे ऐसे देश के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए कि इस तरह की समस्या सिर्फ़ यहीं है... यह वास्तविकता नहीं है."

हाल ही में पाकिस्तान की इसलिए आलोचना हुई थी कि उसने बलात्कार की शिकार एक महिला को अमरीका में होने वाले एक सम्मेलन में हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं दी थी.

ग़ौरतलब है कि 33 वर्षीय मुख़्तार माई के साथ बलात्कार मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख़बरों में आया था. एक पंचायत ने मुख़्तार माई के साथ कथित रूप से बलात्कार करने का आदेश दिया था.

मुख़्तार माई के साथ बलात्कार के अभियुक्त इस मार्च में एक अदालत ने रिहा कर दिए थे लेकिन जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा तो उसके आदेश पर उन अभियुक्तों को फिर से गिरफ़्तार किया गया.

इसके अलावा एक अन्य मामला तब ख़बरों की सुर्ख़ियों में आया जब एक महिला ने आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अपने मातहत पुलिसकर्मियों को उसके साथ बलात्कार का आदेश दिया था.

पाकिस्तान सरकार ने उस महिला के आरोपों की जाँच के आदेश दिए हैं लेकिन महिला का यह भी आरोप है कि जब तक उसका मामला मीडिया में ख़बर नहीं बना, तब तक अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की.

इसी सप्ताह एक मामले में रावलपिंडी की एक महिला ने आरोप लगाया कि उसके साथ चार पुलिसकर्मियों ने सामूहिक बलात्कार किया था. इस मामले में एक सब इंसपेक्टर को गिरफ़्तार किया गया है जबकि तीन अन्य फ़रार हैं.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ये चंद ऐसे मामले हैं जिनके आधार पर स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.

इन संगठनों का कहना है कि बहुत सी महिलाएँ बलात्कार या अपने ख़िलाफ़ हुई हिंसा के मामले सामने नहीं लाती हैं और जो सामने लाती भी हैं तो उनके मामले न्यायालय तक मुश्किल से ही पहुँच पाते हैं.

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