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गुरुवार, 01 सितंबर, 2005 को 00:46 GMT तक के समाचार
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बलात्कार मामले में अधिकारी निलंबित
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़
प्रधानमंत्री ने पूरे मामले की जाँच के आदेश दिए हैं
पाकिस्तान में अधिकारियों ने एक ऐसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया है जिस पर एक विवाहित महिला के साथ बलात्कार करने का आरोप है.

आरोप है कि फ़ैसलाबाद ज़िले के इस पुलिस प्रमुख ख़ालिद अब्दुल्ला ने उस महिला के साथ बलात्कार करने का आदेश दिया जो अपने पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने के लिए आई थी.

ख़ालिद अब्दुल्ला को प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ के आदेश पर निलंबित किया गया है. प्रधानमंत्री ने इस मामले की जाँच के भी आदेश दिए हैं.

ख़ालिद अब्दुल्ला ने इन आरोपों का यह कहते हुए खंडन किया है कि उन्होंने कोई ग़लत काम नहीं किया. उन्होंने यह भी कहा है कि वह महिला झूठ बोल रही है.

पाकिस्तान में हर साल सैकड़ों महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाता है लेकिन उनमें से कुछ मामले ही रिकॉर्ड पर आते हैं.

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तेख़ार चौधरी ने इस ताज़ा मामले की पूरी रिपोर्ट दस दिन के अंदर माँगी है.

घटना

23 वर्षीय महिला ने कहा है कि उसे 15 दिन तक ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से हिरासत में रखा गया और एक पुलिस अधिकारी ने उसे "सज़ा देने के लिए" उसके साथ बलात्कार किया क्योंकि उसने अपने पति की हिरासत को सार्वजनिक कर दिया था.

जिस पुलिस अधिकारी पर इस महिला के साथ बलात्कार करने का आरोप है, उसे मंगलवार को निलंबित कर दिया गया था.

महिला का कहना है कि फ़ैसलाबाद के पुलिस प्रमुख ख़ालिद अब्दुल्ला ने ही उस अधिकारी को बलात्कार का आदेश दिया था.

प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ ने मंगलवार को संसद को बताया था, "इस मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी."

बीबीसी संवाददाता आमिर अहमद ख़ान का कहना है कि इस महिला के पति को फ़ैसलाबाद पुलिस ने 'चोरी के वाहनों के काग़ज़ात के साथ जालसाज़ी' करने के आरोप में गिरफ़्तार किया था.

अप्रैल में उसकी पत्नी अपने पति की रिहाई में मदद की गुहार लगाने के लिए राष्ट्रीय एसेंबली में सांसदों से मिलने गई थी लेकिन उसकी गुहार किसी ने नहीं सुनी बल्कि सांसद इस बात पर ज़्यादा चिंतित थे कि कड़ी सुरक्षा के बावजूद उस महिला को संसद भवन में घुसने की इजाज़त कैसे दे दी गई.

महिला को फ़ैसलाबाद पुलिस को सौंप दिया गया था जिसके एक महीने बाद उसे रिहा कर दिया गया था.

महिला का कहना है कि उसकी रिहाई के तुरंत बाद ही उसे लाहौर से अगवा कर लिया गया था, उसकी आँखों पर पट्टी बाँधकर और हथकड़ियाँ पहना कर एक घर में ले जाया गया जहाँ उसे 15 रखा गया और एक पुलिस अधिकारी ने उसके साथ बलात्कार किया.

महिला ने एक स्थानीय टेलीविज़न चैनल को मंगलवार को बताया कि वह ख़ुदकुशी करना चाहती थी लेकिन "मेरे छोटे बच्चों की चीख़-पुकार ने मुझे रोक लिया."

निलंबित पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि यह महिला झूठ बोल रही है और जो लोग उसे जानते हैं वे उसके "ख़राब चरित्र" के बारे में वाकिफ़ हैं.

इस मामले की जाँच के लिए तीन सदस्यों का एक पुलिस दल नियुक्त किया गया है.

पाकिस्तान में हाल के महीनों में बलात्कार के कई मामलों ने तूल पकड़ा है, जिनमें मुख़्तार माई का मामला भी शामिल है.

33 वर्षीय मुख़्तार माई के मामले में आरोप है कि 2002 में पंजाब प्रांत के एक गाँव की पंचायत के आदेश पर उसके साथ बलात्कार किया गया था.

मुख़्तार माई का मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँचा.

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