|
मुख़्तार माई सुप्रीम कोर्ट की शरण में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तानी पंजाब के एक गाँव में कथित रूप से पंचायत के हुक्म से बलात्कार की शिकार हुई महिला मुख़्तार माई ने पाँच अभियुक्तों को रिहा किए जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की है. लाहौर उच्च न्यायालय ने मुख़्ताराँ माई के साथ सन 2002 बलात्कार के छह अभियुक्तों में से पाँच को गत तीन मार्च को बरी कर दिया था. मुख़्तार माई ने लाहौर उच्च न्यायालय के इसी फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. यह याचिका पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 184 के तहत दाख़िल की गई है जो मूलाधिकारों से संबंधित है. याचिका में कहा गया है कि मुख़्तार माई के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है लेकिन लाहौर उच्च न्यायालय ने उसकी अनदेखी करके पाँच अभियुक्तों को बरी कर दिया. मानवाधिकार संगठनों ने इन अभियुक्तों को बरी करने के लाहौर उच्च न्यायालय के इस फ़ैसले की आलोचना की थी. मुख़्तार माई ने शनिवार को पत्रकारों को बताया कि उन्हें देश के सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है. जिन पाँच अभियुक्तों को लाहौर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद रिहा किया गया था उनमें से चार को पिछले सप्ताह ही प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ के आदेश पर फिर से गिरफ़्तार कर लिया गया था. लाहौर उच्च न्यायालय के उस फ़ैसले पर संघीय शरीयत अदालत ने 11 मार्च को अमल स्थगित कर दिया था. पाकिस्तान में शरीयत अदालतों को इस तरह के फ़ैसलों में दख़ल देने का अधिकार है. लेकिन बाद में पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और मामला अपने हाथों में लेने का फ़ैसला किया. मुख़्तार माई की इस याचिका पर सुनवाई की अभी कोई तारीख़ तय नहीं की गई है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||