BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 13 सितंबर, 2006 को 17:56 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
बलात्कार संबंधित विधेयक टला
महिला
महिला संगठन बलात्कार संबंधी क़ानून में संशोधन की माँग करते रहे हैं
पाकिस्तान में इस्लामिक पार्टियों के विरोध को देखते हुए विवादास्पद बलात्कार संबंधित विधेयक बुधवार को संसद में पेश नहीं किया गया.

इस नए विधेयक के तहत बलात्कार के मामले में दोषी लोगों का मुक़दमा दीवानी (सिविल) क़ानून और इस्लामिक क़ानून दोनों के तहत चलाया जा सकता है.

लेकिन कई धर्मनिर्पेक्ष और इस्लामी पार्टियों के विरोध के बाद पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि सर्वसम्मति बनाने के लिए वो इस विधेयक के मसौदे को फिर से तैयार करेगी.

फ़िलहाल पाकिस्तान में बलात्कार के मामले इस्लामी क़ानून के तहत आते हैं लेकिन महिला संगठन इसका कड़ा विरोध करते रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि विवाद की वजह से बलात्कार से संबंधित क़ानूनों में सुधार की प्रक्रिया को धक्का पहुँचा है.

संवाददाता के मुताबिक जिन पार्टियों ने मूल विधेयक का समर्थन किया था वे काफ़ी नाराज़ हैं. वहीं इस्लामी पार्टियाँ और बदलावों की माँग कर रही हैं.

इस्लामी पार्टियों के विरोध को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने पहले ही विधेयक के मूल मसौदे में कुछ बदलाव किए थे.

मसौदे में बदलाव

कई आलोचकों ने आरोप लगाया है कि सुधार प्रक्रिया को वापस लिया गया है जिससे बलात्कार मामलों में महिलाओं के लिए कोई क़दम उठाना और मुश्किल हो जाएगा.

बलात्कार के लिए बने वर्तमान हुदूद ऑर्डिनेंस के मुताबिक विवाह बंधन के बाहर यौन संबंध बनाना अपराध है.

सो इसके अनुसार अगर बलात्कार की शिकार महिला चार पुरुषों को गवाहों के तौर पर पेश नहीं कर पाती है तो ख़ुद उस महिला को ही सज़ा हो सकती है.

साथ ही अवैध संबंध के दोष में उसके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया जा सकता है.

पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इस प्रावधान की वजह से बलात्कार मामलों में सज़ा दे पाना लभगभ असंभव सा हो जाता है.

नए विधेयक में ये प्रावधान रखा गया था कि बलात्कार के अपराध को धर्मनिर्पेक्ष पीनल कोड में रखा जाए जहाँ गवाही से संबंधिक सामान्य का़नून लागू होते हैं.

पर इस्लामी पार्टियों के विरोध की वजह से विधेयक में बदलाव करना पड़ा.

नए मसौदे के मुताबिक बलात्कार का मामला इस्लामी और धर्मनिर्पेक्ष दोनों पीनल कोड के तहत आएगा.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे भ्रम पैदा होगा और शक्तिशाली धार्मिक संगठन ‘कमज़ोर’ न्यायिक प्रणाली को अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ सकते हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
पाकिस्तान में चार को फाँसी
29 जून, 2006 | भारत और पड़ोस
'पश्चिम में भी महिला कमज़ोर है'
13 मई, 2006 | भारत और पड़ोस
'शोषण के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रहेगी'
01 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
'सिर्फ़ पाकिस्तान ही क्यों..?'
07 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>