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गुरुवार, 23 नवंबर, 2006 को 08:43 GMT तक के समाचार
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हू जिंताओ कोटनीस परिवार से मिले
मनोरमा कोटनिस
मनोरमा कोटनीस और उनके परिवार से मिलने चीन के नेता आते रहते हैं
भारत के दौरे पर आए चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने गुरुवार को डॉक्टर द्वारकानाथ कोटनीस के परिवारवालों से मुलाक़ात की.

डॉक्टर द्वारकानाथ कोटनीस ने चीन-जापान युद्ध के दौरान घायल चीनी सैनिकों की सेवा की थी.

कोटनीस परिवार के एक सदस्य के मुताबिक 25 मिनट की भेंट के दौरान हू जिंताओ ने कहा कि चीन हमेशा डॉंक्टर कोटनीस का अभारी रहेगा.

इस मुलाक़ात के दौरान चीन के राष्ट्रपति ने कोटनीस परिवार को एक एलबम भेंट की और परिवारवालों ने उन्हें शॉल, सीडी और डॉ. कोटनीस की जीवनी तोहफ़े में दिया.

हालाँकि कोटनीस परिवार के लिए यह कोई नई बात नहीं थी क्योंकि कोई भी चीनी नेता मुंबई आने पर उनसे ज़रूर मिलता है.

चीन में डॉक्टर द्वारकानाथ कोटनीस को नायक के तौर पर देखा जाता है.

वर्ष 1937 से 1945 के दौरान चीन-जापान युद्ध में घायल चीनी सैनिकों का इलाज़ करते हुए डॉ. द्वारकानाथ कोटनीस की मौत हो गई थी.

सम्मान

 चीन के नेता मेरे भाई और उनके काम को अभी तक याद करते हैं. जब वे लोग मेरे भाई के प्रति आदर जताते हैं तो हमें काफ़ी गर्व होता है.
मनोरमा कोटनिस

डॉक्टर कोटनीस के सम्मान में चीन में डाक टिकट जारी किए गए हैं और उनकी याद में वहाँ स्मारक भी हैं.

डॉकटर कोटनीस की 85 वर्षीय बहन मनोरमा कोटनीस कहती हैं कि मुंबई का दौरा करने वाले ज़्यादातर चीनी प्रतिनिधिमंडल या तो अपने होटल में उन्हें आमंत्रित करते हैं या फिर दक्षिण मुंबई स्थित उनके छोटे से फ़्लैट में मिलने ज़रूर आते हैं.

मनोरमा, उनकी दो छोटी बहनें और पाँच अन्य रिश्तेदारों ने जिंताओ से उनके होटल में मुलाक़ात की.

डॉक्टर कोटनीस के भांजे अनिल खोट ने बताया उनके पास फ़ोन आया था कि चीन के राष्ट्रपति ताज होटल में उनसे मिलना चाहते हैं.

उन्होंने बताया, ''प्रतिनिधिमंडल अक्सर हमारे परिवार से मुलाक़ात करने आता है लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के चलते उनके पास जाकर मिलना ही बेहतर होता है.''

चीन पर जापान के आक्रमण के समय द्वारकानाथ कोटनीस को चार और डॉक्टरों के साथ मानवीय सहायता के लिए वहाँ भेजा गया था.

वर्ष 1910 में महाराष्ट्र के शोलापुर में जन्मे डॉ. कोटनीस बाद में मुंबई चले गए थे और वहीं से उन्हें चीन भेजा गया.

बीमार पड़ने से पहले डॉ. कोटनीस ने युद्ध के मोर्चे पर काम करते हुए कई सैनिकों की जान बचाई. वर्ष 1942 में 32 वर्ष की आयु में ही उनकी मौत हो गई.

यादें

डॉक्टर कोटनिस
डॉं. कोटनिस को चीन में नायक के तौर पर देखा जाता है

मनोरमा कोटनीस उन दिनों को याद करती हुई कहती हैं, ''मेरे भाई काफ़ी ज़िंदादिल इंसान थे. चीन भेजे जाने के बाद सातों भाई-बहनों को अपने और वहाँ की स्थिति के बारे में चिट्ठी लिखकर बताते रहते थे.''

मनोरमा के अनुसार चीन में डॉ. कोटनीस को अपने साथ काम करने वाली नर्स क्वो क्विंगलिन से प्यार हो गया और दोनों ने शादी कर ली.

दोनों को एक बेटा भी हुआ लेकिन मेडिकल की पढ़ाई के दौरान 24 वर्ष की ही आयु में बीमारी की वजह से उसकी मृत्यु हो गई.

क्विंगलिन अभी भी जीवित हैं और चीन में ही डलिन में रहती हैं. मनोरमा और क्विंगलिन का अभी भी संपर्क बना हुआ है.

मनोरमा ने बताया, ''क्विंगलिन भारत भी आ चुकी हैं और उनसे मिलकर मुझे काफ़ी खुशी हुई.''

मनोरमा कहती हैं, '' यह जानकर काफ़ी अच्छा लगता हैं कि चीन के नेता मेरे भाई और उनके काम को अभी तक याद करते हैं. जब वे लोग मेरे भाई के प्रति आदर जताते हैं तो हमें काफ़ी गर्व होता है.''

मनोरमा मुंबई में अपने छोटे से फ्लैट में छोटी बहन वत्सला के साथ रहती हैं. फ्लैट में डॉक्टर कोटनीस के साथ उनके परिवार के लोगों की कई तस्वीरें हैं.

इसके अलावा समय-समय पर मिलने आने वाले चीनी प्रतिनिधिमंडल की ओर से दिए गए यादगार उपहार भी घर में सजाकर रखे गए हैं.

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