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भारत दौरे पर पहुँचे चीन के राष्ट्रपति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ भारत दौरे पर दिल्ली पहुँच गए हैं. अपनी यात्रा के दौरान वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राष्ट्रपति अब्दुल कलाम और अन्य भारतीय नेताओं से मिलेंगे. बैठकों का दौर मंगलवार से शुरु होगा. माना जा रहा है कि आर्थिक और व्यापार संबंधित मुद्दों पर दोनो पक्षों में व्यापक बातचीत होगी. इस दौरान वे महात्मा गाँधी की समाधि पर भी जाएँगे और प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के अलावा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गाँधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और लोकसभा के स्पीकर सोमनाथ चटर्जी से मिलेंगे. उधर तिब्बत के कुछ संगठनों की हू जिंताओ की यात्रा के दौरान विरोध प्रदर्शन करने की योजना है. इसी सिलसिले में उन्होंने सोमवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया. लेकिन पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक सुरक्षा इंतज़ाम किए हैं. दिल्ली में ताज पैलेस में हू जिंताओ कि ठहरने की व्यवस्था की गई है और वहाँ कड़ी सुरक्षा का बंदोबस्त है. इसके अलावा चीन के दूतावास और हैदराबाद हाउस में भी सुरक्षा के इंतज़ाम किए गए हैं. अरूणाचल का मुद्दा उठा हू जिंताओ की यात्रा से मात्र एक हफ़्ते पहले दोनो देशों के बीच अरूणाचल प्रदेश के मुद्दे पर विवाद छिड़ गया था.
भारत में चीन के राजदूत सुन यूशी ने दावा किया था -'जहाँ तक चीन के रुख का सवाल है केवल टावाँग का इलाक़ा ही नहीं, पूरा अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है - और उस पर हमारा हक़ है.' उधर भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पत्रकारों से सवालों के जवाब में कहा था कि 'अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है.' सिक्किम विवाद सुलझा भारत और चीन के रिश्तों में 1962 के युद्ध के बाद भिन्न-भिन्न समय पर तनाव बढ़ता रहा है. हाल में दोनो देशों के रिश्ते तब सुधरने शुरु हुए थे जब जून 2003 में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने चीन की यात्रा की थी. उस दौरान भारत और चीन ने एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें व्यापार और आपसी रिश्ते बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया था. पर्यवेक्षकों के अनुसार इसी समझौते के अनुसार भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा माना गया था और दूसरी ओर चीन ने परोक्ष रूप से सिक्किम को भारत का अंग मान लिया था. व्यापारिक समझौते के तहत भारत और चीन सीमा पर एक और व्यापारिक केन्द्र खोलने पर राज़ी हुए. उस समय तय हुआ कि तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र में ये केंद्र रिकिनगांग में होगा और सिक्किम के चांगू में होगा.
इसके बाद अप्रैल 2005 में भारत-चीन वार्ता तब आगे बढ़ी जब चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ भारत यात्रा पर आए. इस यात्रा के समापन पर भारत के विदेश सचिव श्याम सरन ने स्पष्ट कहा कि चीन ने सिक्किम को स्पष्ट रूप से भारत का अंग मान लिया है. भारतीय विदेश सचिव श्याम सरन ने उस समय कहा था, "एक महत्वपूर्ण बात की तरफ़ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि चीन ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में सिक्किम को भारत का हिस्सा मान लिया है." इसे भारत और चीन के बीच सिक्किम को लेकर लंबे समय चले आ रहे विवाद का अंत माना गया. इसके बाद जुलाई 2006 में लगभग 44 साल के बाद नाथू ला दर्रा व्यापार के लिए खोल दिया गया. नाथू ला दर्रा भारत के सिक्किम और चीन के तिब्बत प्रांत को जोड़ता है. | इससे जुड़ी ख़बरें चीन के धनी लोगों की संपत्ति में वृद्धि03 नवंबर, 2006 | कारोबार चीन में घूसखोरों की शामत24 अक्तूबर, 2006 | कारोबार ‘असेम्बली लाइन’ का देश31 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना हू जिंताओ के दौरे के ख़िलाफ़ प्रदर्शन20 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस जिंताओ की यात्रा में अरुणाचल का मुद्दा14 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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