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जिंताओ की यात्रा में अरुणाचल का मुद्दा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ की भारत यात्रा से कुछ ही दिन पहले दोनो देशों के बीच अरूणाचल प्रदेश के मुद्दे पर फिर विवाद छिड़ गया है. हाल में एक भारतीय टीवी चैनल से बातचीत में भारत में चीन के राजदूत सुन यूशी ने दावा किया था -'जहाँ तक चीन के रुख का सवाल है केवल टावाँग का इलाक़ा ही नहीं पूरा अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है - और उस पर हमारा हक़ है.' उधर भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पत्रकारों से सवालों के जवाब में आज कहा कि 'अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है.' राष्ट्रपति हू जिंताओ की भारत यात्रा से पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और चीन के प्रतिनिधि की बातचीत होनी थी लेकिन फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि ऐसा होगा या नहीं. अरुणाचल प्रदेश के गवर्नर एसके सिंह ने चीन के राजदूत की टिप्पणी को अनुचित बताया है. रिश्ते सुधरे भारत और चीन के रिश्तों में 1962 के युद्ध के बाद भिन्न-भिन्न समय पर तनाव बढ़ता रहा है.
हाल में दोनो देशों के रिश्ते तब सुधरने शुरु हुए थे जब जून 2003 में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने चीन की यात्रा की थी. उस दौरान भारत और चीन ने एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें व्यापार और आपसी रिश्ते बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया था. पर्यवेक्षकों के अनुसार इसी समझौते के अनुसार भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा माना गया था और दूसरी ओर चीन ने परोक्ष रूप से सिक्किम को भारत का अंग मान लिया था. व्यापारिक समझौते के तहत भारत और चीन सीमा पर एक और व्यापारिक केन्द्र खोलने पर राज़ी हुए. उस समय तय हुआ कि तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र में ये केंद्र रिकिनगांग में होगा और सिक्किम के चांगू में होगा. सिक्किम विवाद सुलझा
इसके बाद अप्रैल 2005 में भारत-चीन वार्ता तब आगे बढ़ी जब चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ भारत यात्रा पर आए. इस यात्रा के समापन पर भारत के विदेश सचिव श्याम सरन ने स्पष्ट कहा है कि चीन ने सिक्किम को स्पष्ट रूप से भारत का अंग मान लिया है. भारतीय विदेश सचिव श्याम सरन ने उस समय कहा था, "एक महत्वपूर्ण बात की तरफ़ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि चीन ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में सिक्किम को भारत का हिस्सा मान लिया है." इसे भारत और चीन के बीच सिक्किम को लेकर लंबे समय चले आ रहे विवाद का अंत माना गया. इसके बाद जुलाई 2006 में लगभग 44 साल के बाद नाथू ला दर्रा व्यापार के लिए खोल दिया गया. नाथू ला दर्रा भारत के सिक्किम और चीन के तिब्बत प्रांत को जोड़ता है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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