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नेपाल में शांति समझौता टला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल सरकार और माओवादी विद्रोहियों ने पिछले दस साल से जारी विद्रोह को खत्म करने के लिए होने वाले शांति समझौते पर हस्ताक्षर टाल दिए हैं. दोनों पक्षों का कहना था कि उन्हें शांति समझौते को अंतिम रुप देने के लिए और समय चाहिए. हालांकि दोनों पक्षों में से किसी ने भी इस देरी के कारणों पर ज्यादा रोशनी नहीं डाली लेकिन दोनों ही पक्षों ने किसी बड़े कारण के होने से इनकार किया. इस समझौते के बाद माओवादी विद्रोही भावी अंतरिम सरकार में शामिल हो जाएंगे और साथ ही साथ उनके सभी हथियारों को संयुक्त राष्ट्र की देख रेख में रखा जाएगा. सरकारी वार्ताकारों ने पिछले सप्ताह बीबीसी को बताया कि इस समझौते में नेपाल के भविष्य से जुड़े सभी मुद्दों को ध्यान में रखा गया है. गुरुवार को सरकार की ओर से बातचीत में शामिल प्रदीप ग्यावली ने कहा, “दोनों ही पक्ष समय सीमा को बढ़ाने के लिए राज़ी थे क्योंकि कुछ छोटे मुद्दों के हल निकाला जाना ज़रूरी है”. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जीपी कोईराला और माओवादी नेता प्रचंड के बीच होनी वाली बातचीत के बाद ही समझौते पर हस्ताक्षर की नई तारीख़ पर फैसला किया जाएगा. दूसरी और विद्रोहियों के वार्ताकार देव गुरुंग ने कहा कि समझौते में कोई ‘प्रमुख परेशानी’ नहीं है. शुक्रवार को माओवादी नेता प्रचंड काठमांडु से दिल्ली जाएँगे जहां वे एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करेंगे. ये इस विद्रोही नेता की किसी विश्व मंच पर पहली उपस्थिति होगी. हालांकि पत्रकारों का कहना है कि उनकी इस यात्रा को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है. शांति के लिए प्रतिबद्धता नेपाल के वाणिज्य मंत्री ह्रदयेश त्रिपाठी ने एपी समाचार एजेंसी को बताया कि प्रधानमंत्री कोईराला और प्रचंड समझौते पर हस्ताक्षर अवश्य करेंगे लेकिन इसके लिए जगह और समय अभी तय नहीं किए गए हैं.
इस समझौते के मुताबिक एक महीने के अंदर माओवादी अंतरिम सरकार में शामिल हो जाएँगे. माओवादी नेता प्रचंड ने कहा कि नेपाली जनता की शांति की दीर्घकालिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हम हिंसा नहीं बल्कि राजनीति का इस्तेमाल करेंगे. नेपाल में पिछले एक दशक से जारी इस विद्रोह में अब तक 13,000 से ज्यादा लोगों का मौत हो चुकी है. जून में होने वाले विधान सभा चुनावों से पहले माओवादियों को सात कैंपों में रखा जाएगा. माओवादियों के पास उनके हथियारों की चाबियाँ तो होंगी लेकिन उनके हथियारों को उनसे अलग संयुक्त राष्ट्र की सख्त निगरानी में रखा जाएगा. अप्रैल में एक जन आंदोलन के बाद राजा ज्ञानेन्द्र ने अपना सीधा शासन खत्म कर एक बहु दलीय सरकार का गठन किया था जिसके बाद माओवादियों ने सरकार से शांति के लिए वार्ता शुरु की थी. | इससे जुड़ी ख़बरें शांति वार्ता के लिए तैयार हैं माओवादी18 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'माओवादी लोगों को प्रताड़ित कर रहे हैं'26 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस माओवादियों के साथ वार्ता स्थगित15 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस शांति वार्ता से ठोस समझौते की उम्मीद06 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'माओवादियों से हाथ मिलाना एक जुआ'09 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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