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'माओवादियों से हाथ मिलाना एक जुआ' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला का कहना है कि माओवादियों के साथ हाथ मिला कर उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है. नेपाल सरकार और माओवादी विद्रोहियों के बीच मंगलवार को ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ है जिससे हिमालय की गोद में बसे इस देश में एक दशक बाद शांति की उम्मीद जगी है. समझौते के तहत माओवादियों को एक माह के भीतर अंतरिम सरकार में शामिल कर लिया जाएगा. माओवादियों के नेता प्रचंड ने कहा है कि अब वे हिंसा के बजाए राजनीति का रास्ता अपनाएँगे. नेपाल में पिछले एक दशक में हुई हिंसा में 13 हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं. प्रतिक्रिया नेपाल के प्रधानमंत्री कोइराला ने संसद में कहा, "यह एक बड़ा राजनीतिक दांव था लेकिन मैं यह हमेशा से मानता रहा हूँ कि एक अलोकतांत्रिक ताकत को राजनीति की मुख्य धारा में शामिल करना हमारा दायित्व बनता है." इस समझौते के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है. संवाददाताओं का कहना है कि माओवादी खेमे के साथ साथ आम जनता भी इस बदलाव से खुश दिखाई दे रहे हैं. समझौते से पहले माओवादियों ने शुक्रवार को काठमांडू में एक बड़ी रैली आयोजित करने की घोषणा की थी जिसे अब वापस ले लिया गया है. प्रधानमंत्री कोइराला ने विश्वास जताया कि हिंसा अब दूर की बात हो जाएगी. उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी इतनी जल्दी संघर्ष ख़त्म होने की उम्मीद नहीं थी." हालाँकि उन्होंने इस बात की भी चेतावनी दी कि कुछ प्रतिक्रियावादी तत्व शांति प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर सकते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका ने समझौते का स्वागत किया08 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस माओवादियों और सरकार के बीच सहमति07 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में 'देवी पूजा' की जाँच के आदेश02 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में संघर्ष विराम तीन महीने बढ़ा 29 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल नरेश से सफ़ाई माँगी गई12 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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