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किट घोटाला: मरीजों को मुआवज़े की मांग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मेडिकल किट घोटाले से सर्वाधिक प्रभावित राज्य पश्चिम बंगाल में ख़राब रक्त जाँच उपकरणों के शिकार हुए लोगों को मुआवज़ा देने की मांग की जा रही है. मरीज़ों के अधिकारों के लिए काम कर रहे संगठन 'बेटर ट्रीटमेंट' का मानना है कि ख़ून जाँचने में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की ख़राबी के कारण जानलेवा बीमारियों का संक्रमण हो रहा है. अब तक सौ से ज़्यादा ऐसे लोगों का पता चला है जो इस घोटाले के सामने आने के बाद कराई गई रक्त जाँच में एड्स या हेपेटाइटिस से संक्रमित पाए गए. दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि ख़राब उपकरणों का धंधा आठ अन्य राज्यों में भी चल रहा है और आशंका है कि हज़ारों लोग इसके दुष्परिणाम झेल सकते हैं. मुआवजा 'बेटर ट्रीटमेंट' ने पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग से इस घोटाले का पर्दाफ़ाश करने की माँग की है. संगठन ने संक्रमित ख़ून के शिकार हुए लोगों की सही गिनती करने और उन्हें उचित मुआवज़ा देने की माँग की है. बेटर ट्रीटमेंट का कहना है कि अगर उनकी माँगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे अदालत की शरण में जाएँगे. डॉक्टरों का कहना है कि कई बार एचआईवी पॉजिटिव या हेपेटाइटिस से संक्रमित लोगों को स्वस्थ बता कर उन्हें रक्तदान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. यही ख़ून जब दूसरे लोगों को दिया जाता है, तो वे भी उन बीमारियों से संक्रमित हो जाते हैं. इस सिलसिले में रक्त जाँच उपकरणों की आपूर्ति करने वाली एक कंपनी के मालिक को गिरफ़्तार किया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें मोबाइल फोन बढ़ाता है ब्लड प्रेशर14 सितंबर, 2006 | विज्ञान बड़े 'मेडिकल घोटाले' का पर्दाफ़ाश30 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस दूसरों के धूम्रपान से हड्डियों को नुक़सान06 अगस्त, 2006 | विज्ञान दक्षिण भारत में एचआईवी में कमी30 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस अंग प्रतिरोपण के लिए अच्छी ख़बर25 अक्तूबर, 2004 | विज्ञान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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