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'सहयोग मिलने पर ही सूचना देंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने कहा है कि पाकिस्तान से अपेक्षित सहयोग मिलने पर ही उसके साथ खुफ़िया सूचनाओं का आदान प्रदान किया जाएगा. उन्होंने कहा कि भारत कभी भी आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नरम रूख़ नहीं अपनाएगा. नारायणन ने स्पष्ट किया कि अग़र पाकिस्तान आतंकवादी घटनाओं से जुड़े मामलों पर सहयोग करने से इनकार करता रहा तो भारत आतंकवाद के ख़िलाफ़ प्रस्तावित साझा प्रणाली को ख़त्म करने की एकतरफ़ा घोषणा कर सकता है. ग़ौरतलब है कि क्यूबा में गुटनिरपेक्ष देशों के सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच आतंकवाद विरोधी ढाँचा बनाने पर सहमति बनी थी. सबूत देंगे नारायणन ने उम्मीद जताई कि पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) को भी प्रस्तावित साझा ढाँचे के दायरे में रखा जाएगा. उन्होंने दोहराया कि मुंबई रेल धमाकों में आईएसआई का हाथ होने के सबूत हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले महीने दोनों देशों के बीच विदेश सचिव स्तर की बातचीत शुरू होने से पहले ही पाकिस्तान को सबूत सौंपे जा सकते हैं. उनका कहना है कि प्रस्तावित साझा प्रणाली अभी चल रहे मामलों को देखेगी और ख़ुफ़िया सूचनाओं का आदान प्रदान फिलहाल नहीं होगा. वो कहते हैं, "खुफ़िया सूचनाओं का आदान प्रदान तो हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है. लेकिन ये काफी बाद के चरण में संभव होगा." | इससे जुड़ी ख़बरें 'आपसी विश्वास पर टिका है भविष्य'18 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान के साथ एक 'नई शुरूआत'18 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'शांति प्रक्रिया में प्रगति संभव नहीं'29 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ की आत्मकथा में करगिल भी25 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस आतंकवाद के आगे नहीं झुकेंगे-मनमोहन15 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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