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आतंकवाद के आगे नहीं झुकेंगे-मनमोहन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान को 'आतंकवाद' पर लगाम कसने की हिदायत दी है. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने का सीधा असर शांति वार्ता पर पड़ सकता है. 60 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास से जुड़ी चुनौतियों, किसानों की समस्याओं और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में आए बदलावों का जिक्र किया. उन्होंने कहा, "ये साफ़ है कि जब तक पाकिस्तान अपने नियंत्रण वाले इलाक़ों से आतंकवाद रोकने के अपने वादों पर अमल के लिए ठोस क़दम नहीं उठाएगा तब तक भारत में शांति वार्ता को समर्थन देने वाला जनमत कमजोर होता रहेगा." उन्होंने कहा कि आतंकवाद कहीं भी हो ये शांति और समृद्धि के लिए ख़तरा है जिससे एकजुट होकर निपटना होगा. प्रधानमंत्री ने मुंबई की रेलगाड़ियों में हुए धमाकों का जिक्र करते हुए आतंकवाद के साथ साथ नक्सलवाद को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा करार दिया. उन्होंने कहा, " ऐसी ताकतें हमें कमजोर करना चाहती हैं. हमारी एकता पर चोट पहुँचाना चाहती हैं. सांप्रदायिक दंगे फैलाना चाहती हैं. हम ऐसा हरगिज नहीं होने देंगे. " चरमपंथी हिंसा पर तल्ख़ टिप्पणी करते हुए डॉ मनमोहन सिंह ने कहा, "जो हमें हज़ार घाव देकर चोट पहुँचाना चाहते हैं, वो याद रखें कि कोई भी भारत को झुका नहीं सकता." नक्सली समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने राज्यों से आदिवासियों को लक्ष्य कर विकास योजनाएँ चलाने का आह्वान किया. प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि जम्मू-कश्मीर के लोग अभी भी 'आतंकवाद' से परेशान हैं. उन्होंने कहा, "हमने वहाँ के सभी गुटों के साथ गोलमेज बैठकों के ज़रिए बातचीत करना शुरु कर दी है. हम उनके लिए बेहतर भविष्य के रास्ते खोज रहे हैं." विकास में भागीदारी
डॉ मनमोहन सिंह ने भारत की तेज आर्थिक विकास दर की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि पिछले तीन माह में औद्योगिक विकास दर 11 प्रतिशत रहा है और सेवा क्षेत्र में भारतीय कंपनियाँ खूब विदेशी मुद्रा ला रही हैं. उन्होंने कहा, "नई रेलवे लाइनें बन रही हैं. हवाई अड्डे बन रहे हैं. विशेष आर्थिक क्षेत्र उभर रहे हैं. चारो ओर विकास की हलचल है." लेकिन विकास की इस गति में समाज के हर तबके को भागीदार बनाने पर प्रधानमंत्री का जोर रहा. उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का लक्ष्य ग़रीबी मिटाना होना चाहिए. ख़ास कर उन्होंने भुखमरी और किसानों के आत्महत्या करने पर मजबूर होने की सच्चाई सामने लाते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा, "मुझे एहसास है कि देश के कई हिस्सों में हमारे किसान संकट में हैं. जब मैं विदर्भ गया तो वहाँ किसानों को हालात ने मुझ पर गहरा असर डाला." बड़ी परियोजनाओं से होने वाले विस्थापन और दुनिया के बाज़ार तक पहुँच से फाएदों के साथ आम आदमी को हो रहे नुकसान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "विकास के पहिए को आगे बढ़ाते हुए ये ध्यान रखना होगा कि कोई तबका पीछे न छूट जाए. ऐसा विकास हो जिसमें रोजगार के समान अवसर मिले." योजनाएँ राष्ट्रीय रोजग़ार गारंटी योजना को ग़रीबी उन्मूलन के लिहाज से बेमिसाल क़ानून बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका दायरा बढ़ाया जाएगा. उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर रोजग़ार देने में सक्षम हथकरघा जैसे छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाएगी. प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि सहकारी बैंकों के लिए 13 हज़ार करोड़ रुपए का पैकेज लागू हो गया है. उन्होंने महंगाई पर भी चिंता जताई और इसे नियंत्रण में रखने के लिए ज़रुरी क़दम उठाने का आश्वासन दिया. |
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