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कर्नाटक में अंग्रेज़ी पढ़ाने का विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कर्नाटक के स्कूलों में अंग्रेज़ी को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने की राज्य सरकार की घोषणा से वहाँ का साहित्य जगत दो धड़ों में बँट गया है. अभी कर्नाटक में अंग्रज़ी विषय छठी कक्षा से पढ़ाया जाता है जबकि सरकार चाहती है कि इसे पहली कक्षा से पढ़ाया जाए. कन्नड़ भाषा को बढ़ावा देने की पैरवी करने वाले लोग जहाँ इसका विरोध कर रहे हैं, वहीं कुछ लेखक सरकार के फ़ैसले के समर्थन में भी आगे आए हैं. कन्नड़ साहित्य परिषद के साहित्यकारों का कहना है कि राज्य सरकार का यह फ़ैसला स्तब्ध करने वाला है और इससे कन्नड़ भाषा को नुकसान होगा. इन लोगों ने सरकार से फ़ैसले को वापस लेने की भी माँग की है. कन्नड़ लेखकों ने अंग्रेज़ी को अनिवार्य विषय किए जाने के फ़ैसले के विरोध में राज्य सरकार के कार्यक्रमों का बहिष्कार करने का भी आह्वान किया है. दूसरी ओर सरकार के फ़ैसले का समर्थन करने वाले दलित लेखक के मारूलासिद्दाप्पा का कहना है, "अंग्रज़ी शहरी और उच्च मध्य वर्ग के बच्चों के करियर में काफ़ी सहायक साबित होता रहा है, जबकि अंग्रजी भाषा का ज्ञान न होने से ग्रामीण दलित बच्चे पिछड़ जाते है." कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारास्वामी विरोध कर रहे लेखकों और विद्वानों से मिलकर यह समझाने वाले हैं कि नौकरी पाने के लिए ग़रीब बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाना ज़रूरी है. फ़ैसला वर्ष 1994 में बनाए गए क़ानून के अनुसार कर्नाटक में 11 साल से कम उम्र के छात्रों को कन्नड़ छोड़कर किसी अन्य भाषा में नहीं पढ़ाया जा सकता. लेकिन वहाँ इस कानून का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा था. इसलिए पिछले दिनों राज्य सरकार ने क़ानून का उल्लंघन करने वाले 14 हज़ार स्कूलों को बीच सत्र में ही बंद करने की घोषणा की थी. पिछले सप्ताह इस फ़ैसले को पलटते हुए कर्नाटक सरकार ने छह-सात साल की उम्र से बच्चों के लिए अंग्रेजी भाषा को अनिवार्य करने की घोषणा कर दी. कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारास्वामी फ़ैसले के समर्थन में तर्क देते हुए कहते हैं कि कन्नड़ को सभी स्तरों पर बढ़ावा दिया जाएगा लेकिन अंग्रेजी करियर के लिए ज़रूरी है. उनका कहना है कि ग्रामीण छात्र अंग्रेजी न जानने की वज़ह से कई अवसरों से वंचित रह जाते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें हिंदी और वेल्श में है काफ़ी समानताएँ15 मार्च, 2005 | पहला पन्ना 'हिंदी को काजभाषा भी बनाएँ'17 फ़रवरी, 2005 | पत्रिका भाषा की लड़ाई में फँसी फ़िल्म वीर-ज़ारा26 नवंबर, 2004 | पत्रिका उगते सूर्य के देश के हिंदीप्रेमी14 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस हिंदी सिनेमा का बड़ा योगदान 14 सितंबर, 2003 | पहला पन्ना भारतीय अंग्रेज़ी की गाइड | भारत और पड़ोस क्यों कठिन है चीनी भाषा?30 जून, 2003 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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